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Thursday, March 5, 2026
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Sanatan Dharma: सनातन धर्म पर दिए विवादित बयान पर उदयनिधि अड़े, अब राष्ट्रपति और महाभारत को भी शामिल किया

sanatan Dharma Disputed Statement: तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन (Udayanidhi Stalin) सनातन धर्म को लेकर दिए बयान पर कायम हैं। विवाद खड़ा होने पर उदयनिधि ने फिर अपने बयान का बचाव किया है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन (Udayanidhi Stalin) सनातन धर्म को लेकर दिए बयान पर कायम हैं। विवाद खड़ा होने पर उदयनिधि ने फिर अपने बयान का बचाव किया है। अब उन्होंने अपने बयान के पक्ष में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर महाभारत तक का जिक्र कर दिया है। उदयनिधि का दावा है कि नए संसद भवन के उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ भेदभाव के कारण उन्हें नहीं बुलाया गया।

नई संसद के उद्घाटन में मुर्मू को नहीं बुलाना सनातन भेदभाव का उदहारण

पत्रकारों ने जब स्टालिन से सामाजिक भेदभाव का एक उदाहरण देने के लिए कहा तो उन्होंने कहा- राष्ट्रपति मुर्मू को नई संसद के उद्घाटन के लिए आमंत्रित नहीं किया जाना वर्तमान सनातन भेदभाव का एक उदाहरण है।

अंगूठे मांगे बिना सद्गुणों का प्रचार जारी रहेगा

इससे पहले स्टालिन ने महाभारत के उदाहरण के साथ भेदभाव पर टिप्पणी की थी। उन्होंने शिक्षक दिवस पर ट्वीट किया-शिक्षक अतुलनीय हैं। वे केवल आने वाले पीढ़ी के बारे में सोचते हैं। हमारे द्रविड़ आंदोलन और उन शिक्षकों के बीच का बंधन, जो अंगूठे मांगे बिना सद्गुणों का प्रचार करते हैं, हमेशा के लिए जारी रहेगा। पेरियार के तर्कवादी सिद्धांतों पर आधारित द्रमुक ने कई दशकों से सनातन धर्म का विरोध जारी रखा है।

कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार हैं उदयनिधि

उदयनिधि स्टालिन ने बयान से साबित किया कि वह किसी कानूनी कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले शनिवार को स्टालिन के ऊपर तमिलनाडु में कार्यक्रम के दौरान सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ फेंकने का बयान देने का आरोप लगा था। उदयनिधि स्टालिन ने सनातन की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से कर दी थी। उन्होंने अपने इन बयानों को लेकर कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहने की बात तक कह दी थी।

स्टालिन के बयान पर बड़ा विवाद

स्टालिन के बयान से पूरे देश में विवाद छिड़ गया है। नेताओं, साधु-संतों, शिक्षाविदों ने स्टालिन के विवाद पर जमकर प्रतिक्रिया दी है। अयोध्या के पुरोहित तपस्वी छावनी मंदिर के मुख्य पुजारी जगदगुरु परमहंस आचार्य ने स्टालिन का सिर काटने वालों को एक हजार रुपए इनाम देने का एलान किया था।

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