नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश में हिंदूओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं ने जोर पकड़ लिया हैं। हाल ही में इस्कॉन मंदिर में हमलों और हिंदू समुदाय के लोगों पर हमलों ने चिंता को और बढ़ा दिया है। वहीं “कोलकाता और असम पर चार दिन में कब्जा करो” के आह्वान से लेकर भारत के प्रधानमंत्री को निशाना बनाकर लगाए गए भड़काऊ नारों पर बांग्लादेश के भावनाओं में उछाल देखा गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैलता जा रहा है।
धार्मिक स्वतंत्रता और बढ़ती भारत विरोधी बयानबाजी पर चिंता व्यक्त की है।
इस विषय पर बांग्लादेश सरकार ने इन घटनाओं की जांच करने का वादा किया है, लेकिन फिलहाल हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। इस हिंसा को लेकर बांग्लादेश में सियासी और सत्ताधारी में बहस तेज हो गई है।
इस बीच, इस्कॉन के भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी ने विरोध को और हवा दे दी है, जिसमें कई लोगों ने सरकार की कार्रवाई को धार्मिक अल्पसंख्यकों पर सीधा हमला बताया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी बांग्लादेश की बिगड़ती धार्मिक स्वतंत्रता और बढ़ती भारत विरोधी बयानबाजी पर चिंता व्यक्त की है।
अगर जरूरत पड़ी तो हम चार दिनों में कोलकाता पर कब्जा कर सकते है।
इसी बीच, शनिवार की रैली में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिला, क्योंकि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने न केवल नारे लगाए बल्कि विभाजनकारी कहानियों को भी बढ़ावा दिया। भारत के नेतृत्व को निशाना बनाने वाले नारे और हिंदू विरोधी भावना के खुले प्रदर्शन ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर किए जा रहे धार्मिक अत्याचारों को रेखांकित किया। सेवानिवृत्त सैन्य मेजर शरीफ ने भारत के खिलाफ विवादस्पद बयान देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका हमारे देश के ताकत के सामने कहीं नही लगते और दावा करते हुए बोले, बांग्लादेश के पास 30 लाख छात्रों का समूह हैं, जो उनके साथ हरपल मजबूती से खड़े हैं। अगर जरूरत पड़ी तो हम चार दिनों में कोलकाता पर कब्जा कर सकते है।
‘कोई भी ताकत हमें नहीं रोक सकती’
मेजर शरीफ ने चेतावनी लहजें में कहा, “मैं भारत को यह कहना चाहता हूं, कि हम चार दिनों में सब कुछ हल कर लेंगे। हमारी सेना और हमारे लोग मजबूती से हमारे साथ खड़ें हैं। कोई भी अन्य शक्तियां हमें रोक नहीं सकती। इसी के साथ वहां इस्कॉन मंदिर में भी आगजनी की गई, इसके अलावा अन्य मंदिरों में भी तोड़फोड़ की गई हैं।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाएं भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर गहरा असर डाल सकती हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से प्रगति पर हैं लेकिन इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। हालिया हिंसा के बीच सोशल मीडिया पर हिंदुओं के खिलाफ तमाम भड़काऊ भाषण के वीडियो देखें जा सकते हैं।





