नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया। इसे लेकर हुए मतदान में जहां भारत ने हिस्सा ही नहीं लिया तो वहीं अमेरिका ने इस प्रस्ताव के खिलाफ रूस के पक्ष में मतदान किया।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए इस प्रस्ताव में तनाव कम करते हुए यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान करने का आह्वान किया गया था। इस प्रस्ताव के पक्ष में 93 देशों ने मतदान किया। जिसमें जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और जी7 (अमेरिका को छोड़कर) जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। रूस, अमेरिका, इजरायल और हंगरी सहित 18 ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट डाले।
पहली बार अमेरिका ने चुना अलग रास्ता
यूक्रेन युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए प्रस्ताव पर अमेरिका और रूस एक साथ खड़े नजर आए। ध्यान देने वाली बात है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बीते तीन सालों में अमेरिका हमेशा यूरोपीय देशों के साथ मतदान करता था। यह पहली बार है जब उसने अलग रास्ता चुना है। अमेरिका में आया यह बदलाव यूरोपीय पक्ष से अलग होने का संकेत देता है। यह अमेरिकी नीति में एक बड़ा बदलाव भी दर्शाता है।
यूक्रेन से रूसी सैनिकों की वापसी की मांग
यूएनजीए हॉल में यह प्रस्ताव पारित हुआ और सदस्य देशों ने प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने का स्वागत किया। इसमें आक्रमण के 3 साल पूरे होने पर यूक्रेन से सभी रूसी सैनिकों की तत्काल वापसी की मांग भी की गई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मसौदा प्रस्ताव पर अमेरिकी मिशन की अंतरिम प्रभारी राजदूत डोरोथी शिया ने कहा कि पिछले प्रस्तावों में मांग की गई है कि रूस यूक्रेन से अपनी सेना वापस ले, लेकिन प्रस्ताव युद्ध को रोकने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘यह बहुत लंबे समय से चल रहा है और यूक्रेन, रूस और अन्य स्थानों के लोगों को इसकी बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।




