Pakistan में चुनावी नतीजों के बीच इमरान खान को 12 मामलों में जमानत, शाह महमूद कुरैशी को 13 केस में जमानत

Pakistan News: पाकिस्तान में आम चुनाव के घोषित हो रहे नतीजों के बीच शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को आतंकवाद विरोधी अदालत (एटीसी) ने नौ मई के दंगों से संबंधित 12 केस में जमानत दे दी।
Imran Khan and Shah Mahmood Qureshi got bail in Pakistan
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रावलपिंडी, (हि.स.)। पाकिस्तान में आम चुनाव के घोषित हो रहे नतीजों के बीच शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को आतंकवाद विरोधी अदालत (एटीसी) ने नौ मई के दंगों से संबंधित 12 केस में जमानत दे दी। इसके अतिरिक्त इमरान के करीबी सहयोगी और मुल्क के पूर्व विदेशमंत्री शाह महमूद कुरैशी को 13 केस में जमानत प्रदान कर दी।

चुनाव में इमरान खान की पार्टी के समर्थित 92 उम्मीदवार जीते

जिओ न्यूज टीवी के अनुसार दोनों की जमानत अर्जी पर एटीसी न्यायाधीश मलिक इजाज आसिफ ने फैसला सुनाया। गौरतलब है कि इस चुनाव में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार अब तक 92 सीटें जीतकर सबसे आगे हैं।

किसी अन्य दिन सुनवाई करने के अभियोजन पक्ष के अनुरोध को खारिज किया

इससे पहले आज अदालत ने इसी मामले में अवामी मुस्लिम लीग (एएमएल) के प्रमुख शेख राशिद अहमद को भी जमानत देते हुए रिहा करने का आदेश दिया। पीटीआई के वकील शिराज अहमद रांझा ने अदालत में खान और कुरैशी का पक्ष रखा। साथ ही इस दौरान न्यायाधीश ने किसी अन्य दिन सुनवाई करने के अभियोजन पक्ष के अनुरोध को खारिज कर दिया।

इमरान की गिरफ्तारी के बाद लगभग पूरे मुल्क में दंगे हुए थे

जिओ टीवी के अनुसार पिछले साल 27 दिसंबर को कुरैशी को शुरू में अदियाला जेल से जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) हमले के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन पर नौ मई, 2023 के हिंसक विरोध प्रदर्शन से संबंधित 12 अन्य मामलों में मामला दर्ज किया गया जबकि खान को नौ जनवरी को जीएचक्यू हमले के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इमरान की गिरफ्तारी के बाद लगभग पूरे मुल्क में दंगे हुए थे। इसके बाद हिंसा और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों के आरोप में पीटीआई के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को सलाखों के पीछे भेज दिया गया।

सेना ने नौ मई को "काला दिवस" करार दिया

विरोध प्रदर्शन के दौरान उपद्रवियों ने रावलपिंडी में जिन्ना हाउस और जनरल मुख्यालय (जीएचक्यू) सहित नागरिक और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। सेना ने नौ मई को "काला दिवस" करार देते हुए प्रदर्शनकारियों पर सेना अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने का फैसला किया था।

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