संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित, अफगानी महिलाओं पर लगी पाबंदियां खत्म करे तालिबान

सभी देशों से आग्रह किया गया है कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर UN द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुरूप तालिबान द्वारा महिलाओं पर लगाई पाबंदियों को तत्काल वापस लिए जाने की दिशा में प्रयास करें।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित, अफगानी महिलाओं पर लगी पाबंदियां खत्म करे तालिबान

न्यूयॉर्क, एजेंसी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव पारित कर तालिबान से अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगी पाबंदियां खत्म करने की मांग की है। साथ ही तालिबान प्रशासन द्वारा महिलाओं को संयुक्त राष्ट्र के लिए काम करने से रोके जाने की निंदा भी की है।

सुरक्षा परिषद में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जापान और संयुक्त अरब अमीरात ने संयुक्त प्रस्ताव पेश किया। 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया, जिसमें अफगानिस्तान में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित कर वहां महिलाओं और लड़कियों की पूर्ण, समान और अर्थपूर्ण भागीदारी पर जोर दिया गया है। साथ ही, सभी देशों और संगठनों से आग्रह किया गया है कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों के अनुरूप तालिबान द्वारा महिलाओं पर लगाई पाबंदियों को तत्काल वापस लिए जाने की दिशा में प्रयास करें।

तालिबान शासन के बाद से महिलाओं पर हैं पाबंदियां
बता दें कि अगस्त 2021 में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के बाद से वहां सार्वजनिक जीवन में महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों पर पाबंदियां थोप दी गयी हैं। इनमें लड़कियों की माध्यमिक और उच्च शिक्षा पर पाबंदी के साथ अपने किसी परिवार के पुरुष सदस्य की मौजूदगी के बिना बाहर जाने, काम करने, शिक्षा प्राप्त करने और यात्रा करने के अधिकारों पर लगी पाबंदियां शामिल हैं। दिसंबर 2022 में तालिबान ने पहले महिलाओं के गैर-सरकारी संगठनों के लिए काम करने पर और फिर संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ काम करने पर भी रोक लगा दी गयी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने कहा कि ऐसी पाबंदियों से अफगानिस्तान में मानवाधिकार और मानव कल्याण सिद्धांत कमज़ोर हुए हैं। प्रस्ताव में जोर देकर कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के इतिहास में महिलाओं के काम करने पर लगाई गयी यह रोक अभूतपूर्व है।

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