नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी का तापमान तेज हो गया है। योगी सरकार के दो कैबिनेट मंत्रियों अनिल राजभर और ओमप्रकाश राजभर के बीच जुबानी जंग अब सार्वजनिक मंच से निकलकर सियासी गलियारों तक गूंजने लगी है। मां के दूध चोर और व्यापारी समाज के अपमान जैसे शब्दों ने इस विवाद को और तीखा बना दिया है।
सुहेलदेव जयंती से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत सुहेलदेव जयंती के कार्यक्रम से मानी जा रही है। मंच से दिए गए भाषण में अनिल राजभर ने समाज को “बेचने” और “चोर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। हालांकि अनिल राजभर का कहना है कि उन्होंने न तो किसी नेता का नाम लिया और न ही किसी पार्टी का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नाम नहीं लिया गया, तो लोग इसे अपने ऊपर क्यों ले रहे हैं।
मां के दूध वाले बयान पर बवाल
अनिल राजभर के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए ओमप्रकाश राजभर ने मीडिया से बातचीत में कहा था अगर अनिल राजभर ने अपनी मां का दूध पिया है, तो बताएं कि देश में किस दुकान पर वोट बेचा जाता है। इस बयान पर अनिल राजभर ने कड़ी आपत्ति जताई। वाराणसी सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में मां जैसे पवित्र रिश्ते को नहीं लाना चाहिए। उन्होंने कहा,“हम सब अपनी मां का दूध पीकर ही बड़े हुए हैं। इस तरह की भाषा न राजनीति को शोभा देती है, न समाज को। अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि जब भी वह पिछले कुछ वर्षों से बड़े कार्यक्रम करते हैं, कुछ लोग जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं। उनका दावा है कि 10-15 लोगों को शराब पिलाकर कार्यक्रम में भेजा जाता है, ताकि हंगामा हो और उनका भाषण बाधित किया जा सके।
व्यापारी समाज के सम्मान का मुद्दा
लोहा चोर जैसे शब्दों को लेकर अनिल राजभर ने इसे व्यापारी समाज का अपमान बताया। उन्होंने भावुक होते हुए अपने पिता का जिक्र किया और कहा कि उनके पिता भारतीय नौसेना में रहे, चीन और पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़े और देश के लिए सम्मानित हुए। अनिल राजभर ने कहा, “सेना से रिटायर होकर आदमी रोजी-रोजगार करता है। व्यापार कोई अपराध नहीं है। देश का हर व्यापारी सम्मान का हकदार है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज के आग्रह पर उनके पिता ने व्यापार छोड़कर राजनीति में कदम रखा और दो बार विधायक बने। अपने बयान में अनिल राजभर ने गठबंधन की मर्यादा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में शब्दों का चयन सोच-समझकर होना चाहिए। गठबंधन में हैं, नहीं तो आप भी मुझे अच्छे से जानते हैं।





