नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। विश्वभर में लोगों की बदलती जीवनशैली के कारण उन्हें स्वास्थय संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज के समय में काफी संख्य में लोग श्वास संबंधी बीमारियों का सामना कर रहे हैं। इसके पीछे का कारण है फेफड़ों का अस्वस्थ होना। इसके पीछे कई कारण जैसे वातावरण का प्रदूषित होना या किसी ऐसी उत्पाद का सेवन करना जिससे फेफड़ों पर असर पड़ रहा है। लोगों द्वारा सेवन किए जाने वाला उत्पाद तंबाकू ऐसा उत्पाद है जो फेफड़ों पर काफी हद तक गंभीर असर डालता है। यहां तक कि जिस उत्पादों में तंबाकू का इस्तेमाल होता है उसपर लिखा होता है, ‘तंबाकू के सेवन से कैंसर होता है’, लेकिन फिर भी ऐसे उत्पादों का सेवन किया जाता है। आज 31 मई है और इस दिन को ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे’ के रूप में मनाया जाता है। इसका मकसद होता है लोगों के बीच तंबाकू के दुष्प्रभावों को बताना।
क्यों है तंबाकू घातक?
विशेषज्ञों के अनुसार बीड़ी, सिगरेट, हुक्का या किसी और तरह के तंबाकू उत्पाद में निकोटीन होता है। निकोटीन एक तरह का केमिकल उत्पाद है। यह खून में शामिल होता है और दिमाग में डोपामिन रिलीज करता है। डोपामिन एक ऐसा हार्मोन है जिससे शरीर को खुशी मिलती है और एनर्जी महसूस होती है। इस हार्मोन के कारण लोगों को लगता है कि इससे उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। लेकिन बता दें कि निकोटीन हमारे नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है। जिसके परिणामस्वारूप हमें निकोटीन की लत पड़ जाती है। एक बार इसकी लत लग जाए तो आसानी से छूटती नहीं है। लेकिन अगर कोई इसे छोड़ने की कोशिश करता है तो वो आसानी से नहीं छोड़ पाता है। छोड़ने की प्रक्रिया के दौरान कई प्रकार के सिंपटम देखने को मिलते हैं। इसमें शामिल है नींद न आना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, काम में मन न लगना और थकान महसूस होना।
किस-किस बीमारी का है खतरा?
अब क्योंकि निकोटीन सीधा नर्वस सिस्टम पर हमला बोलता है और फेफड़ो में दिक्कत आती है। तो ऐसी स्थिति में हृदय को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिसके कारण हृदय संबंधी दिक्कते होती हैं। साथ ही स्ट्रोक का खतरा भी होता है। इसके अलावा क्योंकि इसका असर नर्वस सिस्टम पर होता है तो इंसान के रिस्पॉन्स टाइम में भी फर्क पड़ता है। कैंसर के तो हमेशा ही तंबाकू के उत्पादों से खतरा रहता है।
अन्य ख़बरों के लिए क्लिक करें – www.raftaar.in





