नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कद्दावर नेता रहे आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी के संकेत खुद उन्होंने दिए हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह जन सुराज पार्टी के लिए दूसरा बड़ा झटका माना जाएगा। पटना में आयोजित दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम में आरसीपी सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आमने-सामने नजर आए। इसी कार्यक्रम के बाद आरसीपी सिंह ने मीडिया से बातचीत में कई अहम बातें कहीं, जिससे उनकी जेडीयू में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं।
”नीतीश कुमार और मैं कभी अलग नहीं थे”
आरसीपी सिंह ने कहा, “नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह कभी अलग नहीं थे, दोनों एक ही हैं। बिहार की जनता नीतीश कुमार को पसंद करती है। मैं उन्हें 25 सालों से जानता हूं, मुझसे बेहतर कोई उन्हें नहीं जानता। उन्होंने बताया कि पटेल समाज की ओर से दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था, जिसमें नीतीश कुमार भी शामिल हुए और उन्हें भी आमंत्रित किया गया था। जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या वे जेडीयू में वापस आएंगे, तो आरसीपी सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा, “खरमास खत्म होने का इंतजार कीजिए। इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि बहुत जल्द उनकी जेडीयू में वापसी हो सकती है। बता दें कि 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान आरसीपी सिंह ने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज का दामन थामा था। जन सुराज के ही सिंबल पर उनकी बेटी लता सिंह ने अस्थावां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले आरसीपी सिंह जेडीयू छोड़कर बीजेपी में गए थे, लेकिन जब नीतीश कुमार दोबारा एनडीए में लौटे तो बीजेपी में भी वे असहज महसूस करने लगे। इसके बाद उन्होंने जन सुराज जॉइन किया।
JDU संगठन को मजबूत करने की तैयारी?
सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू भी चाहती है कि संगठन को फिर से मजबूत किया जाए और इसके लिए आरसीपी सिंह जैसे अनुभवी नेताओं की वापसी फायदेमंद हो सकती है। यही वजह है कि उनकी घर वापसी की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हाल ही में भोजपुरी सिंगर रितेश पांडेय के इस्तीफे के बाद अब अगर आरसीपी सिंह भी जन सुराज से दूरी बनाते हैं, तो यह पार्टी के लिए बड़ा झटका होगा। चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद जन सुराज पहले ही दबाव में है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि खरमास खत्म होते ही आरसीपी सिंह आधिकारिक रूप से जेडीयू में वापसी का ऐलान करते हैं या नहीं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ सकता है।





