हेमंत चले NDA के पास? जानिए झारखंड में JMM और BJP कैसे एक दूसरे की बन रहे हैं जरूरत

झारखंड की राजनीति में इन दिनों बड़ी हलचल मची हुई है। चर्चाएं तेज हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जल्द ही एनडीए का हिस्सा बन सकती है।

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PM Modi
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नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। झारखंड की राजनीति में इन दिनों बड़ा हलचल मची हुई है। चर्चाएं तेज हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जल्द ही एनडीए का हिस्सा बन सकती है। बीते एक हफ्ते से लगातार ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें बीजेपी और हेमंत सोरेन के बीच बढ़ती नजदीकियों की बातें कही जा रही हैं। हाल ही में हेमंत सोरेन का दिल्ली दौरा और कथित तौर पर बीजेपी नेताओं से हुई बैकचैनल बातचीत के बाद इन अटकलों को और हवा मिल गई है। हालांकि कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन में किसी भी प्रकार की टूट से इनकार किया है, वहीं JMM की सांसद महुआ माजी ने भी इन खबरों को बेबुनियाद बताया है। इसके बावजूद जेएमएम की ओर से सोशल मीडिया पर आए “झुकेगा नहीं” जैसे क्रिप्टिक पोस्ट ने सस्पेंस और बढ़ा दिया है।

 हेमंत सोरेन की NDA में जाने की मजबूरियां?

हेमंत सोरेन का नाम बीते कुछ वर्षों से ईडी और सीबीआई की जांच से जुड़ा रहा है। मनी लॉन्ड्रिंग और खनन घोटाले के मामलों में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। ऐसे में सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि एनडीए में शामिल होकर वे “सुरक्षा कवच” तलाश रहे हैं ताकि कानूनी दबाव से राहत मिल सके। झारखंड पर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो चुका है। केंद्र से मिलने वाले फंड में कमी, जीएसटी क्षतिपूर्ति का बकाया और रुकी हुई योजनाओं के कारण सरकार दबाव में है।

ई-कल्याण छात्रवृत्ति, मइया सम्मान योजना, ठेकेदारों का भुगतान और विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि एनडीए में आने से केंद्र से ज्यादा मदद मिल सकती है। 2024 के चुनाव में जेएमएम इंडिया गठबंधन के साथ थी, लेकिन बिहार में हुए चुनावों में खुद को नजरअंदाज किए जाने से पार्टी नाराज बताई जा रही है। जेएमएम नेताओं के बयानों से भी साफ है कि इंडिया ब्लॉक को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।

बीजेपी के लिए हेमंत सोरेन क्यों जरूरी हैं?

झारखंड में बीजेपी की सबसे बड़ी कमजोरी आदिवासी क्षेत्रों में कमजोर पकड़ है। 2024 के चुनाव में अधिकतर एसटी सीटें JMM के पास चली गईं। हेमंत को साथ लाकर बीजेपी “ट्राइबल कार्ड” मजबूत करना चाहती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के बाद अब झारखंड ही ऐसा बड़ा राज्य बचा है जहां बीजेपी सत्ता से बाहर है। अगर जेएमएम साथ आई, तो पूरा हिंदी बेल्ट एनडीए के कब्जे में आ सकता है। बीजेपी पहले ही नीतीश कुमार, चिराग पासवान और अजित पवार जैसे नेताओं को साथ लेकर अपनी समावेशी राजनीति का संदेश दे चुकी है। हेमंत सोरेन के साथ आने से बीजेपी को आदिवासी समुदाय में बड़ी सियासी बढ़त मिल सकती है।