नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चिदंबरम के द्वारा पेश किए गए 1997 के बजट को ड्रीम बजट कहा जाता है। इसका मुख्य कारण चिदंबरम द्वारा बजट में कुछ सुधार करना था। वहीं फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, चिदंबरम के 1997 का द्वारा बजट पेश करने के बाद बीएसई सेंसेक्स में 6.5% की बढ़ोतरी हुई थी। यह उस समय के बजट के लिए एक बहुत ही सकारात्मक बात थी। फोर्ब्स की एक और रिपोर्ट के अनुसार चिदंबरम के ड्रीम बजट का आगे चलकर इतना अच्छा असर हुआ कि वर्ष 1997 का इनकम टैक्स कलेक्शन 18,700 करोड़ रूपये से बढ़कर वर्ष 2013 में 2 लाख करोड़ रूपये से अधिक हो गया था।
चिदंबरम ने उत्पाद शुल्क सरंचना को भी आसान बना दिया था
आइए जानते हैं कि चिदंबरम ने अपने बजट में क्या सुधार किए थे कि उसको आगे चलकर ड्रीम बजट कहा गया। चिदंबरम ने इसके लिए सबसे पहले आयकर दर स्लैब में बदलाव किया, उन्होंने आयकर दर स्लैब को 40% से घटाकर 30 कर दिया था। वहीं घरेलू कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट कर की दर में भी बदलाव कर दिया था, उन्होंने इस दर को 40% से घटाकर 35% कर दिया था। यही नहीं चिदंबरम ने अधिकतम सीमा शुल्क में भी बदलाव किया, उन्होंने इस दर को 50% से घटाकर 40% कर दिया था। चिदंबरम ने उत्पाद शुल्क सरंचना को भी आसान बना दिया था।
चिदंबरम ने सरचार्ज को खत्म कर दिया था
चिदंबरम ने सरचार्ज को खत्म कर दिया था। उन्होंने रॉयल्टी दरें भी कम कर दी थी। चिदंबरम ने विदेशी संस्थागत निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए निवेश की सीमा बढ़ा दी थी। चिदंबरम ने ही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश के लिए जमीन तैयार करने की पहल की। वहीं चिदंबरम एक नया मानदंड लेकर आए। जिसके अनुसार अगर कोई भी व्यक्ति चार में से दो शर्तों को पूरा करता हो तो उसको अनिवार्य रूप से रिटर्न दाखिल करना होगा। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इन शर्तों में चार पहिया वाहन का मालिक होना, अचल संपत्ति का मालिकाना हक़ होना, पिछले साल किसी विदेश यात्रा करना या टेलीफोन का मालिक होना शामिल है।
चिदंबरम ने स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना (VDIS) का आरंभ किया
चिदंबरम ने स्वैच्छिक आय प्रकटीकरण योजना (VDIS) का आरंभ किया और उन्होंने वर्ष 1996 के बजट में शुरू किए गए न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) के कुछ प्रावधानों में ढील देने का निर्णय लिया।
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