नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। आज 2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश कर दिया गया किया है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर संसद में मौजूद रहने और सरकार के पक्ष में मतदान करने का निर्देश दिया है। वहीं, विपक्ष ने इस विधेयक के विरोध की रणनीति तैयार करने के लिए अपने सांसदों के साथ बैठक की थी। विधेयक में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को बढ़ाना है। इसमें राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में अब दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, बोर्ड में दो मुस्लिम महिलाओं की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है। इस स्थिति में वक्फ बोर्ड के CEO की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। आइए जानते हैं कि वक्फ बोर्ड के CEO कौन होते हैं, उनकी जिम्मेदारियां क्या होती हैं और उन्हें कितनी सैलरी मिलती है।
वक्फ बोर्ड के CEO कौन होते हैं?
वक्फ बोर्ड के CEO (Chief Executive Officer) एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होते हैं, जो राज्य वक्फ बोर्ड के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हैं।
वक्फ बोर्ड के CEO की नियुक्ति कौन करता है?
वक्फ अधिनियम, 1995 के अनुसार, वक्फ बोर्ड के CEO की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। आमतौर पर, इस पद पर IAS, RAS, PCS या अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को नियुक्त किया जाता है।
CEO की भूमिका और जिम्मेदारियां
राज्य में वक्फ संपत्तियों के उचित उपयोग और संरक्षण को सुनिश्चित करना। वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत कानूनी मामलों की देखरेख करना और किसी भी अनियमितता पर कार्रवाई करना। बोर्ड के कर्मचारियों की नियुक्ति और उनकी गतिविधियों का समन्वय करना। वक्फ की आय, खर्च और संपत्तियों की देखभाल करना। राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय स्थापित करना और वक्फ संपत्तियों के विकास से जुड़ी सरकारी योजनाओं को लागू करना।
सैलरी और सुविधाएं
रिपोर्ट्स के अनुसार, IAS या PCS अधिकारियों को अतिरिक्त पदभार के रूप में वक्फ बोर्ड का CEO नियुक्त किया जाता है। इसके लिए अलग से सैलरी नहीं दी जाती। हालांकि, उन्हें सरकार की ओर से कुछ विशेष सुविधाएं दी जाती हैं, जिनमें शामिल हैं सरकारी आवास आधिकारिक वाहन सुरक्षा व्यवस्था यात्रा भत्ता आदि। वक्फ बोर्ड के CEO की भूमिका वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन और पारदर्शिता बनाए रखने में अहम होती है। उनकी नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है और वे वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत कार्य करते हैं। हालांकि, उन्हें अलग से सैलरी नहीं मिलती, लेकिन सरकार द्वारा अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।




