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Wednesday, March 4, 2026
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सिंधु जल समझौते पर भारत की रोक से अब बूंद-बूंंद को तरसेगा पाकिस्तान, जानिए कब और क्‍याें हुआ था ये समझौता?

भारत ने सिंधु जल समझौता रोकने का फैसला किया है। यह फैसला कैबिनेट मामलों की सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक में लिया गया है। पाकिस्‍तान में सिंधु जल प्रणाली वहां की लाइफलाइन मानी जाती है।

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्क । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए बड़े आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के खिलाफ अब सख्त कदम उठाया है। भारत ने सिंधु जल समझौता रोकने का फैसला किया है। यह फैसला कैबिनेट मामलों की सुरक्षा समिति (CCS) की बैठक में लिया गया है। पाकिस्‍तान में सिंधु जल प्रणाली वहां की लाइफलाइन मानी जाती है, अब इस समझौते पर रोक से पाकिस्‍तान में भारी जल-अन्‍न का संकट पैदा हो सकता है। 

पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का आदेश दिया

बैठक में सरकार ने भारत स्थित पाकिस्तानी दूतावास को बंद करने और किसी भी पाकिस्तानी को भारतीय वीजा नहीं देने का फैसला भी किया है। वहीं CCS की बैठक में अटारी बॉर्डर को भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। साथ ही 48 घंटों में पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है।

जानिए सिंधु जल समझौता

भारत और पाकिस्तान के बीच बहने वाली नदी सिंधु और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को यह ऐतिहासिक समझौता हुआ था। इस समझौते को सिंधु जल समझौता कहा जाता है। यह समझौता विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था और इसका उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल का दोनों देशों के बीच बंटवारा करना था।

बंटवारे को लेकर था विवाद

इस समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने हस्‍ताक्षर किए थे, जिस पर विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। इस समझौते का उद्देश्य भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच जल के बंटवारे को लेकर किसी भी तरह के विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से हल करना था।

ये 6 प्रमुख नदियां शामिल

सिंधु नदी प्रणाली में छह प्रमुख नदियाँ शामिल हैं, इनमें सिंधु, सतलज, झेलम, चिनाब, रावी और ब्यास नदियां शामिल हैं। इस समझौते के तहत भारत सिंधु नदी प्रणाली के पानी का केवल 20% ही इस्तेमाल कर सकता है। बाकी 80% पानी पाकिस्तान को देता है। सिंधु पाकिस्तान की लाइफलाइन कही जाती है।

ऐसे हुआ था जल का बंटवारा

पश्चिमी नदियाें में सिंधु, झेलम, और चेनाब का जल अधिकार पाकिस्तान को मिला था तो पूर्वी नदियां जिनमें रावी, ब्यास और सतलुज का जल अधिकार भारत को दिया गया था। इनमें भारत को पश्चिमी नदियों पर सीमित इस्तेमाल की अनुमति है, जैसे- सिंचाई, घरेलू इस्तेमाल और जल को बिना रोक कर रखे बिजली उत्पादन। 

पाकिस्तान में गहरा जाएगा जल संकट 

पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत कृषि भूमि पर सिंचाई सिंधु जल प्रणाली पर ही निर्भर है। सिंधु जल समझौते पर भारत के रोक लगाने से पाकिस्तान में जल संकट गहरा जाएगा, जिसका सीधा असर कृषि पर पड़ेगा। खेतों में सिंचाई रुकने से सूखा पड़ जाएगा और फसल उत्पादन ठप हो जाएगा। वहीं पाकिस्‍ताान की करीब 21 करोड़ से ज्यादा आबादी की जल आपूर्ति भी इसी सिंधु जल प्रणाली पर निर्भर है। यानी इसके रुकने से अब इतनी ही आबादी पीने के पानी को तरसेगी। 

लाखों लोग पीने के पानी के लिए इस प्रणाली पर निर्भर हैं

इसके अलावा सिंधु नदी से कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पाकिस्तान में चल रहे हैं। यदि जल आपूर्ति नहीं होगी तो इनका उत्पादन प्रभावित होगा और ऊर्जा संकट गहरा जाएगा। जो पाकिस्तान में पहले से ही एक बड़ी समस्या है पाकिस्तान के पंजाब और सिंध इलाकों में लाखों लोग पीने के पानी के लिए इस प्रणाली पर निर्भर हैं।

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