नई दिल्ली , रफ्तार डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर आरोप लगाया कि उन्होंने भारतीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए फंड दिया था। इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज़ हो गई है। सरकार इस मामले में जांच की बात कह रही है, वहीं कांग्रेस ने इस मामले में श्वेत पत्र की मांग की है।
क्या होता है White Paper?
श्वेत पत्र की परंपरा 103 साल पहले 1922 में ब्रिटेन में शुरू हुई थी। श्वेत पत्र या White Paper किसी भी विषय के बारे में हो सकता है। White Paper में किसी भी मुद्दे से जुड़े पूरी जानकारी, उससे जुड़े रिसर्च और उसकी फाइंडिंग्स से जुड़ी जानकारी होती है। इसका इस्तेमाल हमेशा उस विषय से जुड़े काम के तरीके को सुद्रढ़ बनाने के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर सरकार या संस्था की कार्रवाई या परिणाम के निष्कर्ष तक के पहुंचने के लिए होता है।
किसके द्वारा जारी किया जाता है श्वेत पत्र?
सरकार के अलावा किसी भी संस्था, कंपनी, संगठन के द्वारा श्वेत पत्र जारी किया जा सकता है। जिसमें वह अपने ग्राहकों, कर्मचारियों या जनता को अपने प्रोडक्ट या मुद्दों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करती है। इसके अलावा सरकार या कई संस्था द्वारा भी भी श्वेत पत्र जारी करके अलग-अलग मुद्दों पर जानकारी प्रदान करते हैं।
श्वेत पत्र में क्या होता है?
श्वेत पत्र आमतौर पर किसी विशेष मुद्दे विषय से जुड़ी खामियां, उससे होने वाले दुष्परिणामों और बेहतर सुधार के लिए सुझावों जैसे विषय होते हैं। उदाहरण के लिए अगर सुकन्या समृद्धि योजना से जुड़ा श्वेत पत्र होगा तो उसमें उस योजना की पूरी जानकारी, उसके इम्प्लिमेंटेशन, उसकी खामियों, उससे लोगों को मिलने वाले फायदे, योजना का लाभ लेने के तरीके, कितने लोगों को फायदा मिला… जैसी तमाम जानकारियां होंगी।





