नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे जिनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। देश में कंम्प्यूटर क्रांति का जनक उन्हें ही कहा जाता है। हालांकि 21 मई 1991 के दिन तमिलनाडु में LTTE के आतंकवादियों ने आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी । उनकी यह हत्या एसपीजी सुरक्षा हटने के बाद हुई थी। आज भी बहुत से लोग उनकी हत्या की सबसे बड़ा कारण इसी बात को मानते हैं। जानें किस वजह से लिया गया था यह फैसला?
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी इंदिरा गांधी के सुपुत्र थे
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जो इंदिरा गांधी के सुपुत्र थे। उनकी एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के बाद उनपर घातक हमला हुआ था जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन, आज भी बहुत से लोगों के मन में सवाल आता है आखिर क्यों हटाई गई थी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा। क्या था इसके पीछे कारण और किस वजह से लिया गया था या फैसला।
किस वजह से हटाई गई थी SPG सुरक्षा?
साल 1989 में हुए चुनाव में कांग्रेस की हार हुई थी जिसके बाद राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। वहीं उनके बाद वीपी सिंह देश के नए प्रधानमंत्री बने लेकिन वीपी सिंह सरकार की ओर से अगले तीन महीने तक राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा बहाल रखी गई थी जिसके बाद यह सुरक्षा उनके पास से हटा ली गई। क्योंकि उस समय स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी के कानून में पूर्व प्रधानमंत्री को पद से हटने के बाद ये सुरक्षा देना शामिल नही था। इसी वजह से यह फैसला लिया था। जिसके चलते उनकी सुरक्षा कमजोर पड़ गईं थीं।
21 मई 1991 को उन पर एक आत्मघाती हमला
इसी के बाद राजीव गांधी के तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर चुनाव प्रचार के दौरान 21 मई 1991 को उन पर एक आत्मघाती हमला किया गया। जिसमें उनकी मृत्यु हो गईइसी बात को लेकर काफी विवाद हुआ था कि एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के कारण ही उन पर हमला हुआ था।
किन्हें मिलती है एसपीजी सुरक्षा?
बता दे, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी का कानून साल 1988 में पास किया गया था। जिसमें साल 1985 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह फैसला लिया गया था। लेकिन तब तक यह सुरक्षा सिर्फ प्रधानमंत्री और उनके परिवार को ही दी जाती थी। और यही कारण था कि साल 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली गई थी। हालांकि 1991 राजीव गांधी पर हुए आत्मघाती हमले के बाद इस कानून में बदलाव कर दिया गया। और पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवार वालों को भी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया। जो 10 साल के लिए थी। लेकिन, साल 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने इसमें संशोधन करते हुए इस प्रोटेक्शन को 1 साल और खतरे की आशंका होने सरकार के आदेश पर दोबारा से लागू कर दिया था।





