नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर रविवार शाम को विरोध प्रदर्शन के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। वायु प्रदूषण के विरोध में जुटे कुछ प्रदर्शनकारियों ने न केवल सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के समर्थन में नारेबाजी की, बल्कि पुलिसकर्मियों को हटाने की कोशिश के दौरान उन पर मिर्च स्प्रे (Chilli Spray) से हमला भी कर दिया।
इस गंभीर मामले में दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 15 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है और उनके खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने और सड़क जाम करने की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
प्रदूषण के बहाने ‘माओवादी कमांडर’ का समर्थन
यह विरोध प्रदर्शन इंडिया गेट के पास ‘सी हेक्सागन’ में आयोजित किया गया था। पुलिस के अनुसार, इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथ में हाल ही में मारे गए नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के पोस्टर थे।प्रदर्शनकारियों ने कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा जैसे खुले तौर पर नक्सली समर्थन वाले नारे लगाए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रदर्शन का उद्देश्य केवल प्रदूषण विरोध नहीं था।
चिली स्प्रे से पुलिसकर्मियों पर हमला, कई घायल
नई दिल्ली के डीसीपी देवेश कुमार महला ने बताया कि जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर सड़क जाम करने की कोशिश की और एम्बुलेंस जैसी इमरजेंसी सेवाओं को बाधित किया, तब पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया। डीसीपी महला ने एएनआई को बताया कि, यह पहली बार है जब हमने विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर मिर्च स्प्रे का इस्तेमाल देखा। कई प्रदर्शनकारियों की पुलिस से हाथापाई हुई। हमारे कुछ अधिकारियों की आँखों में स्प्रे चला गया, जिनका इलाज राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चल रहा है।
बता दें कि पेपर स्प्रे एक गैर-घातक रसायन है, लेकिन इससे आँखों और श्वसन प्रणाली में तीव्र जलन होती है, जिसका उपयोग भीड़ नियंत्रण या आत्मरक्षा के लिए किया जाता है। प्रदर्शनकारियों द्वारा इसका इस्तेमाल पुलिसकर्मियों पर हमला करने के लिए किया गया। पुलिस ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा बलों पर हमले और देश विरोधी तत्वों के समर्थन में नारेबाजी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। इंडिया गेट पर रविवार को प्रदर्शनकारियों द्वारा जिस नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के समर्थन में नारेबाजी की गई, वह भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास के सबसे क्रूर और वांछित माओवादी नेताओं में से एक था। हिडमा की हाल ही में एक मुठभेड़ में मौत हुई है, जिसे सुरक्षा बलों ने नक्सल आंदोलन पर सबसे बड़ा प्रहार माना है।यहां हिडमा की पूरी प्रोफाइल और वह किस एनकाउंटर में मारा गया, इसकी जानकारी दी गई है।
हिडमा के नाम दर्ज हैं ये खूनी वारदातें
हिडमा लगभग 26 से अधिक घातक नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड था, जिसने सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुँचाया। उसके कार्यकाल में 150 से अधिक जवान शहीद हुए।
2010 ताड़मेटला नरसंहार: इस हमले में 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
2013 झीरम घाटी नरसंहार: छत्तीसगढ़ कांग्रेस की शीर्ष लीडरशिप समेत 27 लोगों की हत्या।
2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: इस हमले में 22 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए थे।
कब और कहाँ हुआ हिडमा का खात्मा?
सुरक्षा बलों के लिए दशकों तक चुनौती बना यह खूंखार नक्सली कमांडर अंततः एक खुफिया ऑपरेशन में मारा गया। आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामाराजू जिले के मारेदुमिल्ली के जंगल (आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के पास।आंध्र प्रदेश स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB), तेलंगाना ग्रेहाउंड्स, डीआरजी (DRG), और सीआरपीएफ कोबरा यूनिट्स के संयुक्त अभियान में इस भीषण मुठभेड़ में माडवी हिडमा समेत उसकी पत्नी राजे (जो संगठन में सक्रिय थी) और चार अन्य माओवादी मारे गए।
सुरक्षा बलों ने हिडमा के खात्मे को नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी जीत और बटालियन नंबर 1 की कमर टूटने जैसा बड़ा झटका माना है। इंडिया गेट पर इसी कुख्यात नक्सली के समर्थन में नारेबाजी करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।





