नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का मुद्दा उभरकर सामने आया है। विपक्ष द्वारा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर की गई अभद्र टिप्पणी पर राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति के प्रति इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न सिर्फ गलत है, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी है। विजय सिन्हा ने यह स्पष्ट किया कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह है, लेकिन मर्यादा और भाषा की सीमा लांघना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने विपक्ष की इस मानसिकता को पूरी तरह अनुचित बताते हुए संयम और जिम्मेदारी बरतने की अपील की।
राबड़ी देवी पर बयान को लेकर सफाई दी
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को लेकर सदन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि जिस भाव से मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी की, उसमें केवल देवर-भौजाई के रिश्ते का संदर्भ था और इसे राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर लेना बिल्कुल उचित नहीं है। विजय सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और मुख्यमंत्री का कोई भी ऐसा इरादा नहीं था, जो अनुचित या अपमानजनक समझा जा सके।
विपक्ष पर साधा निशाना: संविधान में विश्वास की कमी
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विपक्ष के 119 सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया। विजय सिन्हा ने कहा कि विपक्ष संविधान में विश्वास नहीं करता और संवैधानिक पदों का सम्मान नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओम बिरला ने विधायकी कार्यों को बेहतर बनाने और सदन में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का प्रयास किया है। विपक्ष का यह कदम केवल संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और उन्हें डिमोरलाईज करने का प्रयास है, जिसे रोकने के लिए सतर्कता और सावधानी जरूरी है।
कांग्रेस पर तीखा आरोप: संवैधानिक संस्था का अपमान
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कांग्रेस नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि उनका चरित्र ही संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और डर का माहौल बनाना है। सिन्हा ने बताया कि वे हमेशा उन लोगों को कमजोर करने की कोशिश करते हैं, जो बेहतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले सीबीआई और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर सवाल उठाए, और अब देश के सबसे बड़े मंदिर के सबसे बड़े पुजारी पर सवाल उठाकर सदन की गरिमा को गिराने का प्रयास कर रही है।





