नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। 16 दिसंबर 1971… यह तारीख भारत के सैन्य इतिहास में विजय और गौरव का प्रतीक है। इसी दिन भारत ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी थी और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया था। 13 दिनों तक चले इस ऐतिहासिक युद्ध की यादें आज भी उस दौर के सैनिकों के दिलों में ताजा हैं।
पीडी शर्मा की जुबानी युद्ध की यादें
1971 के युद्ध का जिक्र आते ही सेवानिवृत्त ऑनरेरी कैप्टन पीडी शर्मा के चेहरे पर आज भी मुस्कान आ जाती है। हिमाचल प्रदेश के शोघी क्षेत्र की थड़ी पंचायत के नागड़ी गांव के रहने वाले पीडी शर्मा वर्ष 1969 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उनकी तैनाती जालंधर में हुई। तभी 3 दिसंबर 1971 को भारत-पाकिस्तान युद्ध शुरू हो गया और उन्हें पंजाब के जंडयाला गुरु की फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात किया गया। पीडी शर्मा बताते हैं कि युद्ध के दौरान सुविधाएं बेहद सीमित थीं। रात के समय मोर्चे पर तैनात जवानों तक खाना, हथियार और जरूरी सामान पहुंचाने का काम किया जाता था। दुश्मन के हमले से बचने के लिए बिना लाइट जलाए गाड़ियों को चलाया जाता था, जो बेहद जोखिम भरा था। इसके बावजूद आर्मी सर्विस कोर के जवानों ने बहादुरी से अपना फर्ज निभाया।
16 दिसंबर को मानी हार, देश में जश्न
पीडी शर्मा बताते हैं कि 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से हार स्वीकार कर ली। इसके साथ ही बांग्लादेश का जन्म हुआ। युद्ध खत्म होने के बाद जब जवान घर लौटे तो जालंधर, अंबाला और कालका में लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। फूल, उपहार और देशभक्ति के नारों से पूरा माहौल उत्साह से भर गया था। पीडी शर्मा कहते हैं कि 54 साल बीत जाने के बाद भी युद्ध की यादें उनके दिल और दिमाग में ताजा हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे देश सेवा के लिए सेना में भर्ती हों। साथ ही उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर चिंता जताते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की।





