नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश में नए उपराष्ट्रपति के चुनाव से पहले राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। INDIA गठबंधन ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एनडीए की तरफ से सीपी राधाकृष्णन मैदान में हैं। लेकिन सियासत का केंद्र इस वक्त रेड्डी का एक पुराना फैसला बना हुआ है सलवा जुडूम केस। इसी को लेकर बीजेपी ने उन पर वामपंथी विचारधारा से जुड़ा होने का आरोप लगाया है।
क्या था सलवा जुडूम अभियान?
साल 2005 में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ‘सलवा जुडूम’ अभियान शुरू किया गया था। इसका मकसद था बस्तर जैसे इलाकों में नक्सलवाद को रोकना। स्थानीय आदिवासियों को हथियार और प्रशिक्षण देकर नक्सलियों के खिलाफ खड़ा किया गया। शुरुआत में इसे सफल माना गया, लेकिन बाद में मानवाधिकार उल्लंघन, जबरन विस्थापन और हिंसा के आरोप लगे।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी की बेंच ने 2011 में इस अभियान को असंवैधानिक और गैरकानूनी बताया। कोर्ट ने न केवल सलवा जुडूम पर रोक लगाई बल्कि सरकार को आदिवासियों से लिए गए सभी हथियार जब्त करने के आदेश दिए।
अमित शाह का आरोप
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि रेड्डी का यह फैसला नक्सल विरोधी अभियान को कमजोर करने वाला था। उनका दावा है कि अगर सलवा जुडूम जारी रहता तो 2020 तक नक्सलवाद खत्म हो गया होता। शाह ने रेड्डी पर वामपंथी विचारधारा रखने का भी आरोप लगाया।
सुदर्शन रेड्डी का जवाब
सुदर्शन रेड्डी ने साफ किया कि यह फैसला उनका व्यक्तिगत नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट का था। उन्होंने कहा कि वह हमेशा संविधान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं और नक्सलवाद का समर्थन करने का आरोप निराधार है। रेड्डी ने यह भी कहा कि अमित शाह को पूरा 40 पन्नों का फैसला पढ़ लेना चाहिए, तब सच्चाई सामने आ जाएगी। अब सवाल यह है कि सलवा जुडूम केस की यह बहस उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों पर कितना असर डालेगी। बीजेपी इसे मुद्दा बना रही है, जबकि विपक्ष रेड्डी के समर्थन में खड़ा है। आने वाले दिनों में सियासी पारा और चढ़ने की संभावना है।





