नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश विधानसभा में उस समय माहौल हल्का हो गया जब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल का एक पुराना किस्सा सुनाया। उनके बयान पर पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा।
‘बिस्मिल’ और ‘बिस्मिल्लाह’ में फर्क नहीं समझ पाए मंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार के समय Ram Prasad Bismil के शहादत दिवस पर एक कार्यक्रम रखा गया था। शिक्षा विभाग के एक मंत्री को मुख्य अतिथि बनाया गया। योगी ने दावा किया कि जब मंत्री को बताया गया कि कार्यक्रम राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर है, तो उन्होंने पूछ लिया बिस्मिल्लाह खां को तो अभी कोई पुरस्कार मिला था, उन्हें फांसी क्यों दे दी गई? यह सुनकर सदन में जोरदार ठहाके लगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच पर भी मंत्री ने यही बात दोहराई। जब कुछ लोगों ने उन्हें सुधारने की कोशिश की तो उन्होंने उन्हें बीजेपी समर्थक बता दिया।
”अंधेर नगरी चौपट राजा”
मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि जब शिक्षा विभाग की ऐसी स्थिति रही हो तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का हाल समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उस समय “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसी स्थिति थी और इसी कारण नकल माफिया को बढ़ावा मिला।
”कौन मंत्री? अधिकारी ने नहीं पहचाना”
सीएम योगी ने एक और घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह गोरखपुर से सांसद थे, तब एक रेलवे स्टेशन पर राज्य सरकार के कुछ अधिकारी मौजूद थे। उसी दौरान माध्यमिक शिक्षा मंत्री भी वहां पहुंचे, लेकिन एक अधिकारी ने उन्हें पहचान तक नहीं पाया। योगी के मुताबिक जब उन्होंने अधिकारी से पूछा कि क्या वह मंत्री के साथ आए हैं, तो अधिकारी ने पलटकर पूछा “कौन मंत्री?” मुख्यमंत्री ने कहा कि बाद में मंत्री ने खुद बताया कि वह छह महीने से सचिवालय नहीं गए थे, इसलिए अधिकारी उन्हें पहचान नहीं पाया। मुख्यमंत्री के इन बयानों पर विधानसभा में हंसी का माहौल बन गया, लेकिन साथ ही यह शिक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक तंज भी था। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।





