UPSC New Chairman: UPSC को मिला नया चेयरमैन, जानिए कौन हैं डॉ. अजय कुमार जिन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को नया अध्यक्ष मिल गया है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व रक्षा सचिव और वरिष्ठ प्रशासक डॉ. अजय कुमार को UPSC का नया चेयरमैन नियुक्त किया है।

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Dr Ajay Kumar
Dr Ajay Kumar

 नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को नया अध्यक्ष मिल गया है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूर्व रक्षा सचिव और वरिष्ठ प्रशासक डॉ. अजय कुमार को UPSC का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। वे 1985 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं और केरल कैडर से ताल्लुक रखते हैं। उनके पास प्रशासन का 40 वर्षों का अनुभव है।

1 अक्टूबर 2027 तक रहेंगे UPSC प्रमुख

डॉ. अजय कुमार ने अपने करियर में कई अहम पदों पर काम किया है। उन्होंने 23 अगस्त 2019 से 31 अक्टूबर 2022 तक भारत सरकार के रक्षा सचिव के रूप में सेवाएं दीं। उन्हें रणनीतिक सोच और प्रशासनिक कुशलता के लिए जाना जाता है। डॉ. अजय कुमार ने IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए। उन्हें IIT कानपुर द्वारा विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार और एमिटी यूनिवर्सिटी द्वारा दर्शनशास्त्र में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी नवाजा जा चुका है। कुमार की नियुक्ति पूर्व चेयरपर्सन प्रीति सूदन के कार्यकाल पूरा होने के बाद की गई है। प्रीति सूदन का कार्यकाल 29 अप्रैल को समाप्त हुआ था। अब डॉ. अजय कुमार 1 अक्टूबर 2027 तक UPSC के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहेंगे।

UPSC की भूमिका क्या है?

संघ लोक सेवा आयोग भारत की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं का आयोजन करता है, जिसके माध्यम से IAS, IFS, IPS सहित अन्य सेवाओं में चयन होता है। आयोग में अधिकतम 10 सदस्य हो सकते हैं। फिलहाल इसमें दो पद खाली हैं। डॉ. अजय कुमार के साथ ही पूर्व नौकरशाह अनुराधा प्रसाद ने UPSC की सदस्य के रूप में शपथ ली है। वे 1986 बैच की ओडिशा कैडर की अधिकारी हैं। उन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक और दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन के बर्मिंघम यूनिवर्सिटी से विकास प्रशासन में मास्टर डिग्री ली है। UPSC अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 316(1) के तहत की जाती है। चेयरमैन का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है (जो पहले हो)। सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों का कम से कम 10 वर्षों का लोक सेवा अनुभव होना अनिवार्य होता है।

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