नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बजट सत्र के पांचवें दिन अमेरिका से भारतीयों के डिपोर्टेशन के मुद्दे पर संसद में जमकर हंगामा हुआ। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की और “सरकार शर्म करो” के नारे लगाए। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि सरकार इस मामले से अवगत है, क्योंकि यह विदेश नीति से जुड़ा विषय है। विपक्ष के विरोध के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने अमेरिका से भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन पर चर्चा के लिए स्थगन नोटिस दिया। उन्होंने कहा कि 100 से ज्यादा भारतीयों को अमेरिका से जबरन बाहर निकालना मानवाधिकारों का उल्लंघन है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अवैध प्रवासियों को निकालने का अधिकार है और भारत को अपने नागरिकों को स्वीकार करना होगा। हालांकि, उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि भारतीय नागरिकों को हथकड़ी लगाकर और सैन्य विमान से भेजा गया, जो अनुचित था।
अमृतसर एयरपोर्ट पर डिपोर्ट किए गए भारतीयों का आगमन
अमेरिकी सैन्य विमान सी-17 ग्लोबमास्टर 104 अवैध प्रवासी भारतीयों को लेकर अमृतसर के गुरु रविदास इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा। इसमें पंजाब, हरियाणा और गुजरात के प्रवासी शामिल थे। सुरक्षा अधिकारियों द्वारा वैरिफिकेशन के बाद उन्हें उनके घर भेज दिया गया। इन 104 प्रवासियों में से 48 की उम्र 25 साल से कम है, जबकि 13 नाबालिग हैं, जिनमें एक 4 साल का बच्चा भी शामिल है। इन सभी के बायोमीट्रिक स्कैन लिए गए हैं, जिससे वे अब अमेरिका समेत 20 देशों में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। यह पहली बार है जब अमेरिका ने अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट करने के लिए सैन्य विमान का उपयोग किया है। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 6 करोड़ रुपये का खर्च आया, जो एक चार्टर्ड उड़ान की तुलना में छह गुना अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 फरवरी को अमेरिका की दो दिवसीय यात्रा पर जाने वाले हैं। 13 फरवरी को उनकी मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से होगी। पंजाब सरकार ने इस मुद्दे को मोदी-ट्रम्प वार्ता में उठाने की मांग की है।
क्या डिपोर्ट किए गए लोग दोबारा अमेरिका जा सकेंगे?
इन सभी के बायोमीट्रिक स्कैन लिए गए हैं, जिससे भविष्य में वे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन समेत 20 अन्य देशों में वीजा प्राप्त नहीं कर सकेंगे। भारत में इन प्रवासियों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी, क्योंकि उन्होंने अपराध अमेरिका में किया है। हालांकि, पुलिस यह जांच करेगी कि वे अवैध तरीके से अमेरिका कैसे पहुंचे और क्या वे मानव तस्करी गिरोह की मदद से गए थे। प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2023 तक अमेरिका में लगभग 7 लाख अवैध भारतीय प्रवासी रह रहे हैं। इनमें से अधिकतर पंजाब, गुजरात और आंध्र प्रदेश से आते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रपति पद संभालने के 11 दिनों में ही 25,000 से अधिक अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया। अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर अवैध घुसपैठ में 94% की कमी आई है। अमेरिका द्वारा अवैध प्रवासियों पर की गई इस कड़ी कार्रवाई ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। यह मुद्दा भारत-अमेरिका संबंधों पर भी असर डाल सकता है। विपक्ष ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है, जबकि सरकार ने इसे विदेश नीति का मामला बताया है। अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की आगामी अमेरिका यात्रा में यह मुद्दा उठता है या नहीं।




