नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) की दर्दनाक मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस केस में एक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। हादसे के चश्मदीद गवाह मोनिंदर सिंह ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें मीडिया से दूर रहने और तय बयान देने का दबाव बनाया था।
91 घंटे बाद निकली कार, SIT जांच में जुटी
युवराज मेहता की कार को करीब 91 घंटे बाद पानी से भरे बेसमेंट से बाहर निकाला गया। इसके बाद SIT टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। इस दौरान नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों से भी पूछताछ की गई। हादसे ने प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे हादसे के केवल दो चश्मदीद गवाह हैं। एक युवराज के पिता और दूसरे 26 वर्षीय डिलीवरी एग्जीक्यूटिव मोनिंदर सिंह। मोनिंदर वही शख्स हैं जिन्होंने कड़ाके की ठंड में युवराज को बचाने के लिए पानी से भरे गड्ढे में छलांग लगा दी थी।
’10 दिन तक मीडिया से दूर रहने को कहा गया’
मोनिंदर सिंह ने दावा किया है कि हादसे के बाद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें 10 दिन तक मीडिया से दूर रहने का दबाव डाला। उनका कहना है कि पुलिस ने कहा, “मीडिया तो चली जाएगी, तुम यहीं रहोगे। हादसे के तुरंत बाद मोनिंदर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने प्रशासन की लापरवाही को युवराज की मौत की वजह बताया था। इसके बाद वह अचानक मीडिया से गायब हो गए थे।
पुलिस ने दी बयान की स्क्रिप्ट?
मोनिंदर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें यह कहकर बुलाया कि सीनियर अधिकारी बात करना चाहते हैं। इसके बाद उन्हें नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के पास एक पार्क में ले जाया गया, जहां मीडिया से बात करने पर डांटा गया पुलिस के पक्ष में बयान देने को कहा गया एक तय स्क्रिप्ट दी गई उसी के मुताबिक वीडियो रिकॉर्ड कराया गया मोनिंदर का कहना है कि डर की वजह से उन्होंने उस समय पुलिस की बात मान ली। मोनिंदर सिंह ने कहा कि बाद में उन्होंने फैसला किया कि वह सच्चाई से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस केस में अहम गवाह हैं और उनका परिवार व स्थानीय लोग उनके साथ हैं। इस पूरे मामले पर एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि पुलिस ने किसी भी तरह की धमकी नहीं दी है। हालांकि, अगर ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी जांच की जाएगी।





