नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। लगातार दो बार सत्ता में रहने के बाद पार्टी अब तीसरी बार सरकार बनाने (हैट्रिक) के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। इसके लिए पार्टी ने एक बड़ा कदम उठाया है – विधायकों का ऑडिट।
गोपनीय सर्वे शुरू, टिकट से पहले होगी ‘अग्निपरीक्षा’
पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर विधायकों के कामकाज का मूल्यांकन किया जा रहा है। यह ऑडिट गोपनीय तरीके से किया जा रहा है जिसकी जिम्मेदारी सरकार को सौंपी गई है। सरकार ने इस काम के लिए कुछ निजी एजेंसियों को नियुक्त किया है, जो सर्वे का काम चुपचाप शुरू कर चुकी हैं।
तीन श्रेणियों में बंटेगी रिपोर्ट: A, B, C
हर विधायक को उनके प्रदर्शन के आधार पर तीन श्रेणियों – A, B और C में बांटा जाएगा।
A श्रेणी में वे विधायक होंगे जिनका प्रदर्शन शानदार रहा है।
B श्रेणी में औसत काम करने वाले विधायक होंगे।
C श्रेणी में वे विधायक आएंगे जिनका प्रदर्शन कमजोर माना जाएगा और जिनका टिकट कट सकता है।
इन बिंदुओं पर हो रहा है ऑडिट
ऑडिट में विधायक का आंकलन निम्नलिखित बिंदुओं पर किया जा रहा है दो बार के विधायकों का अब तक का परफॉर्मेंस कैसा रहा? विकास कार्यों के लिए मिली निधि का कितना उपयोग हुआ? जनता की समस्याओं को लेकर उनकी सक्रियता कैसी रही? पिछले चुनाव में जीत का मार्जिन कितना था और प्रतिद्वंदी की ताकत क्या थी? जनता में छवि कैसी है? 2027 के चुनाव में जीत की संभावना कितनी है? बीजेपी सिर्फ अपने विधायकों का नहीं, बल्कि विपक्षी दलों का भी विश्लेषण करा रही है। हर सीट पर जातिगत और सामाजिक समीकरणों का भी पूरा आकलन किया जा रहा है। सर्वे में यह देखा जा रहा है कि किस जाति में कौन सी पार्टी की पकड़ मजबूत है और कौन सा प्रत्याशी कितनी लोकप्रियता रखता है।
रिपोर्ट जाएगी शीर्ष नेतृत्व के पास
सभी आंकड़ों और सर्वे रिपोर्ट को एकत्र कर सरकार द्वारा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेजा जाएगा। इसके आधार पर 2027 के टिकटों का फैसला होगा। यानी इस बार टिकट केवल विश्वास और वरिष्ठता पर नहीं, बल्कि कामकाज और जीत की संभावना पर दिया जाएगा। बीजेपी का यह कदम यह साफ संकेत देता है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ उन्हीं चेहरों को मैदान में उतारेगी, जिनकी छवि जनता के बीच साफ हो और जो वाकई विकास कार्यों में सक्रिय रहे हों। जिनका परफॉर्मेंस कमजोर रहा है, उन्हें इस बार टिकट मिलना मुश्किल हो सकता है।





