नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मुद्दे पर गोरखपुर से बीजेपी के विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेंद्र प्रताप सिंह खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने यूजीसी के नियमों को लेकर तीखी आपत्ति जताई है और इसे ‘हिटलरशाही से भी आगे, रौलट एक्ट जैसा’ करार दिया है।
UGC को बताया ‘खलनायक’
देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी शिक्षा का संरक्षक होना चाहिए, लेकिन नए नियमों के जरिए वह खलनायक की भूमिका में आ गया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार उनके द्वारा 22 जनवरी को यूजीसी अध्यक्ष और सचिव को लिखे गए पत्र पर संज्ञान ले। उनका कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को शोषक मानकर बनाए गए हैं, जो पूरी तरह गलत और असंवैधानिक सोच है।
”बिना सुने ही हमें आरोपी मान लिया गया”
बीजेपी MLC ने आरोप लगाया कि 2025 के गजट में झूठी शिकायत पर जुर्माना और दंड का प्रावधान था 2026 के गजट में यह प्रावधान हटा दिया गया पहले नियम सिर्फ SC/ST के लिए थे, अब इसमें OBC को भी जोड़ दिया गया उन्होंने कहा कि बिना पक्ष सुने ही पूरे सवर्ण समाज को आरोपी मान लेना गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है। देवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि नए नियमों में शिकायत करने वाले को प्रमाण देने की जरूरत नहीं शिकायत के बाद विभागाध्यक्ष सीधे नोटिस जारी कर सकता है छात्र को हॉस्टल, परीक्षा और विश्वविद्यालय से बाहर तक किया जा सकता है उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही मानसिकता वाले लोग शिकायत भी करेंगे और सुनवाई भी करेंगे, तो न्याय कैसे संभव है?
”ये नियम समाज में नफरत और टकराव बढ़ाएंगे”
बीजेपी नेता ने चेतावनी दी कि ऐसे नियम समाज में जातीय तनाव और टकराव को बढ़ावा देंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि इससे देश में सिविल वॉर जैसी स्थिति बन सकती है। देवेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया कि वे देश के पहले विधायक हैं, जिन्होंने सबसे पहले इस मुद्दे पर यूजीसी को पत्र लिखा और शांतिपूर्ण विरोध की अपील की। उन्होंने साफ कहा कि जो नियम पहले से ही हमें दोषी मान ले, उसे स्वीकार करने का कोई सवाल ही नहीं है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब यूजीसी का उद्देश्य देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना है, तो आज तक दुनिया की टॉप-100 यूनिवर्सिटी में भारत का एक भी कॉलेज क्यों नहीं है। UGC के नए नियमों को लेकर उठ रही ये आवाजें अब सत्ताधारी दल के भीतर से भी आने लगी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और यूजीसी का रुख क्या होगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।




