कोलकाता, 24 मई (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर 2000 महिला अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर इसकी न्यायिक जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है। पत्र की प्रति पूर्व राजदूत भास्वति मुखर्जी की ओर से दोनों महानुभावों को प्रेषित की गई है। उन्होंने बताया कि देश भर की 2093 महिला अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना और अन्य जजों का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए मामले का संज्ञान लेने की गुहार लगाई है। अपनी चिट्ठी में अधिवक्ताओं ने लिखा है कि चुनाव बाद करीब 15,000 हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई है। 4000 से 5000 लोग घर छोड़कर दूसरे राज्य में शरण लिए हुए हैं। अधिकतर लोग आसाम, झारखंड और ओडिशा जाकर जान बचाने के लिए रह रहे हैं। बर्बर तरीके से लोगों को मौत के घाट उतारा गया और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। यह भारत के संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ है। अधिवक्ताओं ने अपनी चिट्ठी में हिंसक घटनाओं के साथ पूर्व नियोजित हिंसा और राष्ट्र के खिलाफ गतिविधियों से जुड़े लोगों की संलिप्तता का भी दावा किया है। इन घटनाओं को उजागर करने के लिए एनआईए जांच की भी मांग की गई है। हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश





