नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । पूर्वोत्तर भारत का छोटा राज्य त्रिपुरा इन दिनों शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के कारण चर्चा में है। गोवा और मिजोरम के बाद अब त्रिपुरा देश का तीसरा ऐसा राज्य बन गया है, जिसे “पूर्ण साक्षर” का दर्जा प्राप्त हुआ है। यहां की कुल साक्षरता दर अब 95.6% तक पहुंच गई है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
सीएम साहा, जो स्वयं राज्य के शिक्षा विभाग का प्रभार संभालते हैं, उन्होंने कहा, “शिक्षा ही इंसान को काबिल बनाती है। हम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे।” उन्होंने यह भी बताया कि अब त्रिपुरा के ग्रामीण इलाकों में सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय भी स्थापित किए जा चुके हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्य अभी भी साक्षरता के मामले में पीछे हैं, जहां औसत दर राष्ट्रीय स्तर से काफी नीचे बनी हुई है।
कैसे मिलता है किसी राज्य को ‘पूर्ण साक्षर’ होने का दर्जा?
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश को ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ घोषित करने के लिए कुछ स्पष्ट और सख्त मानक तय किए हैं। इसके लिए राज्य की कुल साक्षरता दर कम से कम 95% होनी चाहिए। राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को पढ़ना, लिखना और सामान्य गणना करने में सक्षम होना चाहिए। केवल स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र ही नहीं, बल्कि वयस्क, वृद्ध और विशेष समूहों को भी साक्षरता अभियान के अंतर्गत लाना अनिवार्य होता है।
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि 100% साक्षरता प्राप्त करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होने के कारण UNESCO की सहमति से पूर्ण साक्षरता के मानदंडों में संशोधन किया गया है। देश में साक्षरता के क्षेत्र में अग्रणी होने के बावजूद केरल को अब तक पूर्ण साक्षर राज्य घोषित नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में साक्षरता की स्थिति
उत्तर प्रदेश –
2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश की औसत साक्षरता दर 67.68% थी। इसमें पुरुषों की साक्षरता दर 77.28% और महिलाओं की दर 57.18% दर्ज की गई थी। हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कुल साक्षरता दर बढ़कर करीब 72.6% तक पहुंच गई है।
बिहार –
साक्षरता के मामले में बिहार अब भी पिछड़ा हुआ है। 2011 की जनगणना में राज्य की कुल साक्षरता दर 61.8% दर्ज की गई थी। नई रिपोर्टों के अनुसार, यह आंकड़ा अब भी लगभग 61.80% के आसपास बना हुआ है, यानी प्रगति बेहद धीमी रही है।
मध्य प्रदेश –
2011 के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश की कुल साक्षरता दर 69.3% थी, जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 78.7% और महिलाओं की दर 59.2% थी। हाल के आंकड़े दर्शाते हैं कि यह दर अब 69.32% तक पहुंच चुकी है, यानी सुधार बहुत मामूली रहा है।





