नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अब सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सरकार बड़े वाहनों में सेफ्टी फीचर्स को बढ़ाने की कवायद कर रही है।आने वाले साल यानी अप्रैल 2026 से बसों और ट्रकों के साथ-साथ आठ से ज्यादा लोगों को ले जाने वाले सभी नए यात्री वाहन मॉडल में कुछ एडवांस सेफ्टी फीचर्स को शामिल किया जाऐगा, आखिर क्या है वो पूरा सिस्टम आइए जानते है।
इन चार फीचर को जोड़ने हो रही कवायद
एक रिपोर्ट के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अप्रैल 2026 से बसों और ट्रकों के साथ-साथ आठ से ज्यादा लोगों को ले जाने वाले सभी नए यात्री वाहनों में एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम यानी (ADAS) जैसे फीचर को अनिवार्य करने की योजना बनाई है। जिसमें इन वाहनों में इमेंरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम (AEBS), ड्राइवर ड्राउज़िनेस एंड अटेंशन वार्निंग सिस्टम (DDAWS) और साथ ही लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम (LDWS) जैसे फीचर्स को शामिल किया जाना जरूरी होगा। ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत बचा जा सके और होनेवाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
बस-ट्रक के साथ सभी पैसेंजर वाहन होंगे शामिल
जारी अधिसूचना के अनुसार, मिनी और रेगुलर बसों के साथ-साथ इस कैटेगरी में आने वाले ट्रकों में AEBS और व्हीकल स्टेबिलिटी फ़ंक्शन को शामिल किया जाना चाहिए। दरअसल, ये अलग-अलग पूरा सुरक्षा फीचर्स का एक पूरा ग्रुप है, जिसे एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) के तौर पर जाना जाता है। ये सभी फीचर किसी भी आपात स्थिति में चालक को वार्निंग देते हैं और सुरक्षित ड्राइविंग में मदद करते हैं।
क्या है वो ख़ास सेफ्टी फीचर्स:
इमेंरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम AEBS
वाहन को धीमा करने और टक्कर के प्रभाव को कम करने के लिए इमेंरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम एक जरूरी सुरक्षित साधन है, इसमें यदि ड्राईवर तुरंत एक्शन ना ले तो ये वाहन को धीमा और टक्कर से रोकने ब्रेक एक्टिव करेगा। ताकि दुर्घटना और हानी से बचा जा सके।
लेन डिपार्चर वार्निंग सिस्टम LDWS
LDWS सिस्टम में कैमरे या सेंसर होते हैं जिससे जब कोई वाहन अनजाने में अपनी लेन से बाहर निकल जाता है तो ये सड़क पर लेन मार्किंग जैसे कि सफेद या पीले रंग की लाइनें बनी होती है इसे पहचानकर ये सिस्टम ड्राइवर को चेतावनी देने अलार्म या वाइब्रेशन का उपयोग करता है। इससे ध्यान भटकने या थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
ड्राइवर ड्रॉजिनेस एंड अटेंशन वार्निंग सिस्टम DDAWS
ड्राइवर की सतर्कता की निगरानी करने DDAWS ड्राइवर की स्टीयरिंग मूवमेंट आंखों और सिर की हरकतों पर नज़र रखता है. यह सिस्टम इन्फ्रारेड लाइट से लैस कैमरों का उपयोग करके ड्राइवर की आंखों पर नज़र रखता है, इसमें ड्राइवर की आखें कहां देख रही हैं, वे कितनी खुली हैं और कितनी देर तक देख रही हैं, इसपर नजर रखता है और ड्राइवर के नींद में आने की स्थिति में एक्टिव हो जाता है। और ये सिस्टम लाइट, ऑडियो साउंड चेतावनी जारी करता है। ताकि वाहन कंट्रोल से बाहर न हो जाए।
ब्लाइंड स्पॉट ब्लाइंड स्पॉट सूचना सिस्टम BSMS
बसों और ट्रकों को ऑनबोर्ड ब्लाइंड स्पॉट मॉनिटरिंग सिस्टम (BSMS) एक बेहद ही जरूरी सेफ्टी फीचर्स है, जिसमें BSM सिस्टम में कार के साइड और सामने अल्ट्रासोनिक सेंसर लगे होते हैं जो वाहन के आसपास पैदल चलने वालों और साइकिल चालकों की पहचान करती है विशेष रूप से ब्लाइंड स्पॉट में आने वाले वाहनों या वस्तुओं का पता लगाने में मदद करती है, इसके लिए एक इंडिकेटर लाइट और चेतावनी साउंड देता है जिससे सड़क पर मौजूद अन्य वाहनों से टकराव को कम किया जा सके।
मंत्री नितिन गडकरी ने बताया, क्यों जरूरी है ये फीचर्स…
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी इसी साल के शुरुवात 2025 जनवरी महीने में ही पिछले दो सालों का मंत्रालय के सड़क दुर्घटनाओं के एक डाटा का हवाला देते हुए कहा था कि, ये सिस्टम इसलिए भी जरुरी है ताकि राजमार्गों पर बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित किया जा सके। क्योंकि साल 2023 में सड़क दुर्घटना में करीब एक लाख लोगों में से तकरीबन तैतीस हजार लोगों ने अपनी जाने गवां दी थी। फिलहाल इस प्रावधान को सरकार द्वारा मोटरो में इन फीचर्स को शामिल किए जाने के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई ऐलान नहीं किया गया है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि, ये यदि इन फीचर्स को शामिल किया जाता है तो इससे भविष्य में होने वाले दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है।





