नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश में शोक और आक्रोश है। यह आतंकी हमला इतना भयावह था कि हमले के बाद पीडितों का जख्म अभी भरा भी नहीं है। इस भीषण हमले के बाद पूरा देश सदमे और शोक में डूबा हुआ है। तो वहीं इसे लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में अलग ही हलचल मची हुई है। पीएम मोदी के द्वारा मुंबई के एक कार्यक्रम शिरकत करने पर उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) के ने तीखा तंज कसा है। पार्टी के मुखपत्र सामना के लेख में पीएम मोदी पर हमला बोला है।
कार्यक्रम में शामिल होना उचित था?
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई के एक मनोरंजन कार्यक्रम में शिरकत की थी। इसे लेकर महाराष्ट्र की सियासत में अलग ही हलचल मची हुई है। शिवसेना के मुखपत्र ने पीएम मोदी पर तीखा प्रहार किया है। सामना के संपादकीय में इस बात को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं कि जब देश में 26 निहत्थों की निर्मम हत्या हुई हो, तब क्या मनोरंजन कार्यक्रमों में शामिल होना उचित था?
PM के ‘WAVES’ समिट में भाग लेने पर उठाए सवाल
सामना में छपे संपादकीय लेख के अनुसार, “देश अभी पहलगाम की घटना के दुख से उबरा भी नहीं कि, ऐसे समय में मुंबई में ‘वेव्स’ समिट जैसे चमकदार प्रोग्राम में पीएम के शिरकत होना न केवल असंवेदनशीलता है, बल्कि यह पीड़ितों और उनके परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।” संपादकीय में यह भी लिखा गया कि, मुंबईकरों द्वारा आतंकी हमले में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए जो पोस्टर लगाए गए थे, वे चमचमाते पीएम के स्वागत पोस्टरों के आगे फीके पड़ गए।
पहलगाम की घटना पर नहीं रोए PM- सामना
पहलगाम आतंकी घटना को लेकर सामना ने पीएम मोदी पर जोरदार तंज कसा। संपादकीय में लिखा कि पीएम मोदी को अक्सर मंच पर भावुक होते हुए और कैमरे के सामने रोते देखा गया है, लेकिन पुलवामा और पहलगाम जैसे आतंकी घटनाओं पर उनकी आंखें तक नम नहीं हुईं। सामना ने पूछा कि क्या यह संवेदनशीलता सिर्फ एक अभिनय मात्र है?
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि, “हम इंसानों को यंत्र नहीं बनना चाहिए, बल्कि उन्हें संवेदनशील बनना चाहिए। पीएम के बयान पर सामना ने पलटवार करते हुए लिखा, “जब 26 निहत्थों की लाशें पड़ी हों और देश रो रहा हो, तब भी यदि नेता मुस्कुराते मंच पर हों, तो यह संवेदनशीलता कहां है?”
विदेशी हस्ती के निधन पर राष्ट्रीय शोक क्यों?
संपादकीय में आगे लिखा गया कि, जब कोई पूर्व नेता, वर्तमान नेता या प्रमुख विदेश हस्ती परलोक सिधार जाता है तो भारत में राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है, कई सरकारी कार्यक्रम कैंसिल किए जाते हैं। लेकिन यहां 26 भारतीय नागरिकों की हत्या के बाद भी किसी प्रकार की संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई।





