the-foundation-of-a-strong-fit-and-self-reliant-india-can-be-laid-at-the-domestic-level-ekta-vishnoi
the-foundation-of-a-strong-fit-and-self-reliant-india-can-be-laid-at-the-domestic-level-ekta-vishnoi

घरेलू स्तर पर रखी जा सकेगी मजबूत, फिट और आत्मानिर्भर भारत की नींव : एकता विश्नोई

नई दिल्ली, 11 मार्च (हि.स.)। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के फिट इंडिया अभियान की मिशन निदेशक एकता विश्नोई ने कहा है कि मजबूत, तंदरुस्त और आत्मनिर्भर भारत की नींव घरेलू स्तर पर ही रखी जा सकेगी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में देश की महिलाओं की भूमिका काफी अहम होगी। उन्होंने यह बातें फिक्की और एफएलओ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'फिट वूमेन, फिट फैमिलीज, फिट इंडिया' सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान पैरालंपिक समिति की अध्यक्ष दीपा मलिक ने कहा कि ‘मैं वास्तव में भाग्यशाली हूं कि मेरे परिवार में खेल और फिटनेस की संस्कृति थी। जिससे मुझे अपने सपने को साकार करने का मौका मिला।’ उन्होंने कहा कि परिजनों के भरोसे की वजह से ही वो विकलांगता को लेकर तथाकथित वर्जनाओं को हराने में कामयाब रहीं। फिक्की समिति की सदस्य और मुख्य कॉरपोरेट मामलों व संचार अधिकारी डॉ सुबी चतुर्वेदी ने कहा कि “हम अक्सर सिर्फ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की बात करते हैं लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम यह भी देखें कि सुरक्षित स्थानों तक महिलाओं की पहुंच कितनी है। हमें ऐसा माहौल बनाना होगा जहां महिलाएं पूरी क्षमता से देश के विकास में योगदान दे सकें?” उन्होंने यह भी कहा कि विकास में महिलाओं के योगदान के मामले में हम एक देश के रूप में पीछे नहीं रह सकते हैं, जब अन्य देश महिलाओं की क्षमता और योगदान का पूरा उपयोग कर रहे हैं। युवाओं के लिए सही विरासत और सही मूल्य प्रणाली तैयार करने की जरूरत है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व ओलंपियन अंजू बॉबी जॉर्ज ने अपने गर्भावस्था का जिक्र करते हुए कहा कि ‘एक महिला एथलीट के रूप में मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी मुझे अपना वजन बढ़ाना पड़ेगा। फिट शरीर को छोड़ना मेरे लिए मुश्किल था, इसीलिए मैंने फिर से मेहनत की और वापस अपनी फिटनेस प्राप्त की। देश की हर महिला को खुद को फिट रखना चाहिए तभी वो परिवार और देश का ख्याल रख सकेंगी। वहीं, फिटनेस आइकन और साई की सदस्य सपना व्यास ने कहा कि ‘हमें यह स्वीकार करने की आवश्यकता है कि महिलाएं अपने परिवारों के लिए रोल मॉडल हैं। हमें इसे जिम्मेदारी के रूप में लेने की जरूरत है कि कोई हमें देख कर सीख रहा है।’ इस मौके पर ग्रेसिया रैना फाउंडेशन की सह-संस्थापक प्रियंका रैना ने कहा, “हम महिलाओं के परिवारों और उनके सहयोगियों के लिए कंडीशनिंग या काउंसलिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं। परिवारवालों को यह बताते हैं कि उनके घर की महिलाएं क्या सामना कर रही हैं और उनका समर्थन करने का अच्छा तरीका भी सुझाते हैं।’ इस सम्मेलन को दो सत्रों ‘भारत की नारी : स्वास्थ्य और सम्पन्नता की क्यारी’ तथा ‘शी विन्स : ट्रेडिशनल वैल्यू, मॉर्डन अप्रोच’ में विभाजित किया गया था। जिसमें देश की प्रबुद्ध महिलाओं ने हिस्सा लिया और देश को फिट और प्रगतिशील बनाए रखने में महिलाओं के महत्व पर अपने विचार रखे। साथ ही समाज के लैंगिक पक्षाणी दृष्टिकोण को खुली चुनौती दिए जाने को लेकर युवाओं को प्रोत्साहित भी किया। हिन्दुस्थान समाचार/आकाश

Related Stories

No stories found.