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Monday, March 30, 2026
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20 साल बाद BMC चुनाव के लिए साथ आए ठाकरे ब्रदर्स! BJP की बढ़ीं मुश्किलें, सीट शेयरिंग पर बनी सहमति

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 20 साल बाद फिर से साथ में आ गए है बीएमसी चुनाव में दोनों ठाकरे भाइयों की पार्टियां मिलकर चुनाव लड़ेंगी। ठाकरे ब्रदर्स दोनों दलों के गठबंधन का ऐलान कर दिया।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। बीएमसी चुनाव से पहले करीब 20 साल बाद ठाकरे ब्रदर्स उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक बार फिर साथ आ गए हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने मिलकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस गठबंधन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

शिवतीर्थ पर हुआ ऐतिहासिक ऐलान

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मुंबई के शिवतीर्थ में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की औपचारिक घोषणा की। दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ चुनावी समझौता नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत है। यह गठबंधन सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि बेहद भावनात्मक भी माना जा रहा है। शिवसेना के कई ऐसे पुराने कार्यकर्ता हैं, जिनकी उम्र आज 80-90 साल है और जो बालासाहेब ठाकरे के दौर से पार्टी से जुड़े रहे हैं। ठाकरे भाइयों को एक साथ देखकर ऐसे समर्थकों की आंखें नम हो जाना स्वाभाविक माना जा रहा है।

आज का दिन मराठी मानुष के लिए मंगलमय

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस मौके को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, “आज का दिन मराठी मानुष के लिए मंगलमय है। मुझे संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन का समय याद आता है। आज भी राज और उद्धव मराठी मानुष के लिए मंगल कलश लेकर आए हैं।” इस गठबंधन की घोषणा की सबसे खास बात यह रही कि मंच पर सिर्फ बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर दिखाई गई। न उद्धव ठाकरे की फोटो थी और न ही राज ठाकरे की। दोनों दलों के चुनाव चिन्हों के साथ केवल बालासाहेब का चेहरा रखा गया, जिससे यह संदेश गया कि यह गठबंधन उनकी विरासत और विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए है।

कांग्रेस और शरद पवार के साथ आने के संकेत

गठबंधन के ऐलान के साथ ही शिवसेना (यूबीटी) नेताओं ने यह भी इच्छा जताई कि कांग्रेस और शरद पवार भी उनके साथ आएं। संजय राउत ने कहा कि गठबंधन में हमेशा मनचाही चीजें नहीं मिलतीं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत पसंद के आधार पर।

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