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चलने-फिरने में असमर्थ लोगों और दिल्ली में भारत के सबसे बड़े कुष्ठ गांव के लिए वरदान बना स्वयम

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। ताहिरपुर और दिल्ली के आसपास के इलाकों के निवासी कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण के स्वयम मिशन से लाभान्वित हो रहे हैं। ताहिरपुर के बारे में उल्लेखनीय बात यह है कि यह कुष्ठ पीड़ितों के लिए भारत का सबसे बड़ी कॉलोनी है। स्वयम, स्मिनू जिंदल चैरिटेबल ट्रस्ट की एक शानदार पहल है, जो चलने-फिरने में असमर्थ लोगों की पहुंच और गरिमा के लिए काम करती है। स्थानीय अधिकारियों के साथ, स्वयम ने ताहिरपुर में कुष्ठ कॉलोनियों में और उसके आसपास रहने वाले सभी लोगों के लिए एक अभियान शुरू किया। अभियान शुरू होने के छह महीने बाद, इन कुष्ठ कॉलोनियों में रहने वाले लगभग 5,000 व्यक्तियों को कोरोना के खिलाफ सफलतापूर्वक टीका लगाया है। ये प्रक्रिया जारी है और इसका उद्देश्य इच्छुक और पात्र सभी लोगों का टीकाकरण कराना है। कुष्ठ एक भयानक बीमारी है और कई लोगों को इससे पीड़ित लोगों के पास जाने में भी डर लगता था। अभियान से पहले, ताहिरपुर और ताहिरपुर में लगभग 5,000 परिवारों का जीवन अधर में था क्योंकि कोरोना महामारी के साथ कुष्ठ रोग का कलंक और जटिल हो गया था। इन कॉलोनियों में न केवल टीकाकरण के बारे में जागरूकता फैलाने की अनिच्छा थी, बल्कि निकटतम टीका केंद्रों तक आने में भी बहुत असुविधा होती थी। 61 वर्षीय सुमाई सोरेन कहती हैं, हमारे पास टीकाकरण केंद्र होने के बाद भी, हम अपनी हालत के कारण वहां नहीं पहुंच पाए, लेकिन स्वयम ने न केवल हमें पंजीकृत करवाने में मदद की, बल्कि ताहिरपुर निवासी को सुलभ वैन के माध्यम से टीकाकरण केंद्रों तक आराम से पहुंचने में भी मदद की। स्वयंम की संस्थापक और अध्यक्ष, स्मिनू जिंदल कहती हैं, जैसा कि भारत महात्मा गांधी की 152 वीं जयंती मना रहा है, उनके शब्दों को याद रखना जरूरी है कि किसी भी समाज का सही आंकलन इससे लगाया जा सकता है कि वह अपने सबसे कमजोर सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करता है। एक समाज के रूप में, कम से कम हम अपने बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को सभी के लिए सुलभ बना सकते हैं। ताहिरपुर के निवासियों को विशेष रूप से मोडिफाइड सुलभ वैन का उपयोग करके टीकाकरण कराने की स्वयम की पहल उस दिशा में एक छोटा कदम है। कुष्ट आश्रम के सचिव इंद्रजीत कुमार कहते हैं, स्वयम का शामिल होना इन कॉलोनियों के लोगों के लिए एक वरदान है। स्वयम ने हमें सुलभ वाहन प्रदान किए हैं जो इन निवासियों को टीकाकरण केंद्रों तक लाते हैं। स्वयम लंबे समय चलने-फिरने में असमर्थ सभी लोगों के टीकाकरण में सबसे आगे रहा है, जिसमें बुजुर्गों के साथ-साथ गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। अकेले दिल्ली में दो लाख से अधिक शारीरिक रूप से अक्षम लोग हैं। प्रत्येक व्यक्ति को टीका लगवाने का मिशन तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक कि चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को पहुंच और स्वस्थ जीवन जीने की गरिमा नहीं मिल जाती। –आईएएनएस आरएचए/आरजेएस

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