नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ की प्रतिकृति बनाने के ऐलान पर शंकराचार्य स्वरूपानंद परंपरा के संत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। स्वामी ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी खुद को आक्रमणकारी बाबर से जोड़ेगा, उसे उसी नजर से देखा जाएगा और वैसा ही व्यवहार किया जाएगा।
‘जो बाबर के साथ खड़ा है उसे बाबर ही समझेंगे’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हरिद्वार में बयान देते हुए कहा कि, बाबर एक आक्रमणकारी था और उसके नाम पर किसी धार्मिक संरचना का निर्माण किया जाता है तो निश्चित रूप से प्रतिक्रिया उत्पन्न होगी।उन्होंने हुमायूं कबीर के बयान को ऐतिहासिक घावों से जोड़ते हुए चेतावनी भरे शब्दों में कहा, बाबर ने भारत पर हमला किया और जो अत्याचार किए, वे आज भी पीड़ा देते हैं। अगर वर्तमान समय में कोई व्यक्ति खुद को बाबर की विचारधारा या पहचान से जोड़ता है, तो उसे भी बाबर जैसा ही माना जाएगा।जो बाबर के साथ खड़ा होगा, हम उसे बाबर ही समझेंगे और आज की तिथि में बाबर के साथ जैसा व्यवहार होता, वैसा ही किया जाएगा।
मस्जिद निर्माण पर नहीं, ‘बाबर’ नाम पर आपत्ति
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह स्पष्ट किया कि उन्हें मस्जिद के निर्माण या किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि, हर धर्म को अपनी आस्था के अनुसार उपासना का अधिकार है और इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। स्वामी ने कहा कि, समस्या केवल तब उत्पन्न होती है जब धार्मिक संरचना को ऐसे इतिहास से जोड़ा जाता है जिसने देश की स्मृतियों में दर्द छोड़ा है।मस्जिद बनाना अलग बात है, लेकिन उसका नाम बाबर पर रखना पूरी तरह अलग और संवेदनशील मुद्दा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत में सद्भाव और धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए, लेकिन उकसाने वाले नामों और प्रतीकों से बचना आवश्यक है।





