नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों और कॉरपोरेट के बीच चंदे के लेन-देन की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने 2 अगस्त 2024 को इस मामले की सुनवाई की। यह याचिका एनजीओ कॉमन कॉज और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी, इन दो गैर सरकारी संगठनों ने यह याचिका चुनावी बॉन्ड योजना के माध्यम से राजनीतिक दलों और कॉरपोरेट के बीच चंदा लेने और उसके बदले किसी तरह का लाभ देने की आशंका के चलते सुप्रीम कोर्ट से SITकी जांच कराने की मांग की थी।
राजनीतिक दल ही नहीं बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियां भी शामिल
जानकारी के लिए बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने एनजीओ कॉमन कॉज और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की तरफ से इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच से कहा कि अधिकतर इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए दिए गए दान के बदले दानदाताओं को कुछ न कुछ जरुर दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि कुछ दानदाताओं को तो कॉन्ट्रैक्ट भी दिए गए। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इन मामलों में सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियां भी शामिल हैं। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इसको लेकर आगे कहा कि खुद कोर्ट ने भी अपने फैसले में यही आशंका जताई थी। उन्होंने कहा कि अब जो सामने आ रहा है वो काफी चौकाने वाला है।
इस मामले में SIT जांच की कोई जरुरत नहीं
वहीं मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले को लेकर कहा कि इसमें SIT की जांच की कोई आवश्यकता नहीं है। जिन मामलों में अगर किसी को कोई आशंका है तो वे कानूनी रास्ता चुन सकते हैं। अगर फिर भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाता है तो वे कोर्ट के जरिए अपना केस लड़ सकते हैं। लेकिन इस मामले में SIT जांच की कोई जरुरत नहीं है।
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