नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के फाउंडर बाबा रामदेव और आचार्य बालाकृष्ण के खिलाफ भ्रामक विज्ञापन को लेकर मानहानि के केस को क्लोज कर दिया है। दोनों ने कोर्ट को पतंजलि के प्रोडक्ट्स को लेकर इस केस में दोनों ने कोर्ट को अंडरटेकिंग दी है जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
IMO ने रामदेव और पतंजलि के खिलाफ साल 2022 में केस दाखिल किया था
दरअसल IMO ने रामदेव और पतंजलि के खिलाफ साल 2022 में दाखिल अपने केस में कहा था कि पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन से मॉर्डन दवाइयों के खिलाफ बोले गया है। दावे में कहा गया था कि ये ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडी एक्ट का उल्लंघन है। इससे पहले 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने IMA के प्रेसीडेंट आर वी अशोकन से कहा था कि वो उन सभी प्रमुख अखबारों, पोर्टल और चैनलों में एक माफीनामा दें जिनमें उन्होंने भ्रामक विज्ञापन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
बेंच ने कहा कि खर्च अध्यक्ष अपनी जेब से वहन करेंगे
हीमा कोहली और संदीप मेहता की बेंच ने इस बात को स्पष्ट किया था कि वह इसमें वहन किया गया खर्च भी वो अपनी जेब से करेंगे। इसके बाद कोर्ट ने मामले को स्थगित कर दिया था। उनके वकील ने कहा है कि IMA अध्यक्ष को अपने कहे पर पछतावा है। वह अपने सभी बयानों के लिए माफी मांगते हैं।
कोर्ट ने माफी मांगने के तरीके पर भी आपत्ति जताई
कोर्ट ने उनके माफी मांगने के तरीके पर भी आपत्ति जताई थी। इसके बाद अशोकन के वकील ने कहा कि कोर्ट के कहे अनुसार उनकी माफी विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म और IMA की वेबसाइट पर भी दिया हुआ है। वेबसाइट पर एक पॉप अप में माफी मांगी गई है।
प्ली कर काम कर रहा है कोर्ट
कोर्ट IMA की उस प्ली कर काम कर रहा है जिसमें कहा गया है कि ऐसी गाइडलाइंस तैयार की जाए जिसमें एलोपैथिक दवाई से संबंधित एड पर रोक लगाई जाए।
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