back to top
19.1 C
New Delhi
Saturday, March 21, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

सूफीवाद कश्मीर के सह-अस्तित्व की अटूट विरासत

श्रीनगर, 24 मार्च (आईएएनएस)। सदियों से सहिष्णुता, सह-अस्तित्व, करुणा और भाईचारे के साझा बंधन ने कश्मीर के समाज की एकता को कायम रखा है। स्थानीय मुसलमानों और पंडितों के बीच सामंजस्य और मैत्री का बंधन सूफीवाद में उनके गहरे और अडिग विश्वास के कारण मजबूत रहा है। इस उदार संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने वाले संरक्षक संत शेख नूरुद्दीन वली थे, जिन्हें स्थानीय मुसलमानों द्वारा अलमदार-ए-कश्मीर और शेख उल-आलम और स्थानीय पंडितों द्वारा नुंद ऋषि या नुंद लाल कहा जाता था। नुंद ऋषि का जन्म 1377 में कुलगाम जिले के कैमोह गांव में हुआ था। किंवदंती है कि उन्होंने अपनी मां का दूध पीने से इनकार कर दिया था, तब सूफी समुदाय की लालेश्वरी ने नुंद ऋषि को स्तनपान कराया था। कश्मीर के दोनों समुदायों द्वारा समान रूप से सम्मानित, वह एक रहस्यवादी, कवि और आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने समुदायों की विशाल आबादी को प्रभावित किया। शेख नूरुद्दीन वली की सार्वभौमिक स्वीकृति के कारण ही उन्हें कश्मीर के संरक्षक संत के रूप में जाना जाता है। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन त्याग दिया और कैमोह गांव में एक गुफा में जाकर तपस्या की। उन्होंने स्थानीय रूप से श्रुक के रूप में जानी जाने वाली कविताओं के माध्यम से अपनी शिक्षाओं का प्रसार किया। ऐसी प्रत्येक कविता में छह पंक्तियां होती हैं और यह धार्मिक विषयों, नैतिकता और शांति के इर्द-गिर्द विकसित होती है। दिलचस्प बात यह है कि लाल देड़ के नाम से मशहूर लालेश्वरी, जो संत की पालक माता थीं, कवयित्री भी थीं। कई विद्वानों का तर्क है कि नुंद ऋषि अपनी पालक माता लाल देड़ के आध्यात्मिक शिष्य थे। संत ने अपनी पालक मां के दूध के साथ आध्यात्मिकता और सहिष्णुता को आत्मसात किया। निर्विवाद तथ्य यह है कि दोनों की कविताओं में आपसी सह-अस्तित्व, शांति, करुणा और ज्ञान के संदेश हैं। शेख नूरुद्दीन वली का प्रभाव इतना मजबूत रहा है कि कश्मीर के सबसे उदार सुल्तान, जैनुल आबिदीन, जिन्हें बादशाह के नाम से जाना जाता है, ने 1438 में संत के निधन के बाद उनकी समाधि पर एक मकबरा बनवाया। वर्ष 2005 में भारत सरकार ने श्रीनगर हवाईअड्डे का नाम बदलकर शेख उल-आलम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा कर दिया और इसे अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिया। संत अपने समय से बहुत आगे थे, यह उनके दोहों से साबित होता है। उनका एक दोहा है- एन पोशे तेली येली वान पाशे (भोजन केवल तब तक चलेगा, जब तक जंगल रहेंगे)। दोनों समुदायों के सदस्य मध्य बडगाम जिले में चरार-ए-शरीफ दरगाह पर पहुंचे, जहां संत को दफनाया गया। घाटी से पलायन से पहले पंडित समुदाय के घर में किसी नवजात का जन्म होने पर वे बच्चे को संत का आशीर्वाद दिलाने उनकी समाधि पर ले जाया जाता था। इसी तरह मुसलमान अपने बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए मंदिर में ले जाकर संत का आशीर्वाद दिलाते थे। सुरक्षा बलों के मुताबिक, 11 मई, 1995 को पाकिस्तानी आतंकवादी कमांडर मस्त गुल और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ के दौरान चरार-ए-शरीफ की दरगाह को जला दिया गया था। मस्त गुल ने 150 सहयोगी आतंकवादियों के साथ दरगाह को एक किलेबंद बंकर में बदल दिया था। वहाबी विचारधारा के अनुयायियों के लिए जो इस्लाम की कठोर अवधारणा में विश्वास करते हैं, संतों की पूजा करना और उनकी कब्रों और तीर्थो का दौरा करना एक ऐसी प्रथा है जिसे शुद्ध करने की जरूरत है। आम कश्मीरी के लिए वहाबी व्याख्या सदियों से अस्वीकार्य रही है और यही कारण है कि कश्मीर को पीर वार (संतों और सूफियों का निवास) कहा जाता है। शेख उल-आलम और लाल देड़ की शिक्षाओं का सार कवि सरशर सैलानी ने एक उर्दू दोहे में इस तरह अभिव्यक्त किया गया है : चमन में इख्तिलात-ए-रंग-ओ-बु से बात बंटी है/हम ही हम हैं, तो क्या हम हैं, तुम ही तुम हो, तो क्या तुम हो (यह रंग और सुगंध में भिन्नता है जो बगीचे को महिमा प्रदान करता है/यदि आप और मैं अलगाव में हैं जो जंगल को रंग और सुगंध का दंगा नहीं बनने देगा) –आईएएनएस एसजीके/एएनएम

Advertisementspot_img

Also Read:

छुट्टी रद्द होते ही GenZ कर्मचारी का अनोखा रिएक्शन, एयरपोर्ट से बोलीं- अब 10 दिन बाद ही खुलेगा लैपटॉप

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । सोचिए, आप फ्लाइट पकड़ने ही वाले हों और तभी ऑफिस से मैसेज आए कि आपकी छुट्टियां रद्द कर दी गई...
spot_img

Latest Stories

बॉलीवुड की इन फिल्मों में दिखाई गई Eid की रौनक, आप भी देखें

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। आज 21 मार्च को Eid...

देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही ईद, अलग-अलग शहरों में अदा की गई नमाज; PM मोदी ने दी शुभकामनाएं

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देशभर में आज ईद-उल-फितर बड़े उत्साह...

4 साल बाद यूपी को मिला स्थायी DGP, जानिए कौन हैं एलवी एंटनी देव कुमार जिन्हें मिली जिम्मेदारी

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में लंबे इंतजार के...

सोना सस्ता, पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा: आम आदमी पर दोहरी मार, जानिए आज का पूरा अपडेट

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश में आज आर्थिक मोर्चे पर...

Rani Mukerji को सांवले रंग की वजह से मिला रिजेक्शन, फिर यू पलट गई किस्मत

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। फिल्म जगत में 90's से...

Travel Tips: बिना देरी के निकल जाएं इन जगहों पर, सुंदर हरा -भरा दिखेगा नजारा

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। अगर आप कई दिनों से...

Vastu Tips: नवरात्रि के नौ दिनों तक करें ये खास उपाय, घर में बनी रहेगी सुख समृद्धि

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। नवरात्रि (Navratri) शुरू हो गई...
⌵ ⌵ ⌵ ⌵ Next Story Follows ⌵ ⌵ ⌵ ⌵