नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। नए साल के मौके पर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में बढ़ती पर्यटकों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने नदियों और खड्डों के किनारे जाने पर रोक लगा दी है। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जेल और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
धारा 111 के तहत लागू हुए आदेश
कुल्लू के जिला दंडाधिकारी और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के अध्यक्ष तोरुल एस. रवीश ने हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 111 के तहत यह आदेश जारी किए हैं। इसके तहत जिले की नदियों, खड्डों, नालों और अन्य जल स्रोतों के हाई फ्लड लेवल वाले इलाकों में आम लोगों और पर्यटकों के जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश खासतौर पर नववर्ष समारोह और शीतकालीन पर्यटन सीजन के दौरान लागू किया गया है, जब कुल्लू-मनाली में बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं।
सेल्फी और फोटोग्राफी बनी खतरे की वजह
प्रशासन के अनुसार, सर्दियों के मौसम में कई पर्यटक सेल्फी और फोटोग्राफी के लिए नदी तटों और नदी के बीच तक चले जाते हैं, जो बेहद खतरनाक है। खासतौर पर बजौरा से सोलंग नाला, भुंतर से मणिकर्ण और बंजार क्षेत्र के तीर्थन खड्ड के आसपास ऐसे मामले सामने आए हैं। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद लोग जोखिम उठाते नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने बताया कि सर्दियों में ऊपरी क्षेत्रों से जलविद्युत परियोजनाओं के कारण अचानक पानी छोड़ा जाता है, जिससे डूबने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा बर्फ जमने, फिसलन और कम तापमान के कारण प्रतिक्रिया समय भी कम हो जाता है। पहले भी इन इलाकों में लापरवाही के चलते जान-माल के नुकसान की घटनाएं हो चुकी हैं।
किन्हें मिलेगी छूट?
आदेश के तहत केवल प्राधिकृत साहसिक गतिविधियों या आजीविका से जुड़े कार्यों के लिए ही सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से प्रवेश की इजाजत होगी। आम पर्यटक या नागरिक बिना अनुमति इन क्षेत्रों में नहीं जा सकेंगे। अगर कोई व्यक्ति इन आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम 2007 की धारा 115 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें अधिकतम 8 दिन की जेल, या 1,000 से 5,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों सजा एक साथ दी जा सकती है। यह आदेश शीतकालीन पर्यटन सीजन के दौरान अगले आदेश तक लागू रहेगा। जिला प्रशासन ने सभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे जारी किए गए निर्देशों का पालन करें और अपनी तथा दूसरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। प्रशासन का कहना है कि सख्ती का मकसद सजा देना नहीं, बल्कि किसी भी अनहोनी को रोकना है।





