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राज्य के पास दूसरे राज्यों की लॉटरियों पर कर लगाने की विधायी क्षमता होती है : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राज्य विधानसभाएं अन्य राज्य सरकारों या केंद्र सरकार द्वारा उनके क्षेत्र में चलाई जा रही लॉटरी पर कर लगाने के लिए सक्षम हैं। न्यायमूर्ति एम.आर. शाह और न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि सूची दो की प्रविष्टि 34 में सट्टेबाजी और जुआ विषय राज्य का विषय है। अब यह स्पष्ट है कि लॉटरी जुआ गतिविधि की एक प्रजाति है और इसलिए लॉटरी सट्टेबाजी और जुआ के दायरे में आती है, जैसा कि प्रविष्टि 34 सूची 2 में दिखाया गया है। अगर लॉटरी निजी पार्टियों या भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसियों द्वारा संचालित की जाती है, तो यह सूची 2 की प्रविष्टि 34 के दायरे में आती है। शीर्ष अदालत ने अन्य राज्य सरकारों की लॉटरी पर कर लगाने के लिए कर्नाटक और केरल द्वारा पारित कानूनों की वैधता को बरकरार रखा। पीठ की ओर से निर्णय लिखने वाले न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि कर्नाटक और केरल सरकार अन्य राज्य सरकारों द्वारा आयोजित लॉटरी पर कर लगा सकती है, क्योंकि अदालत ने कर्नाटक और केरल द्वारा अपने संबंधित उच्च न्यायालयों के फैसलों को चुनौती देने वाली अपील की अनुमति दी थी। उच्च न्यायालयों ने माना था कि राज्य सरकारें अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसे नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम द्वारा चलाई जाने वाली लॉटरी पर कर नहीं लगा सकती हैं और उन्हें पैसे वापस करने का आदेश दिया था। अपने 122 पन्नों के फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा, उच्च न्यायालयों की खंडपीठों का यह मानना सही नहीं था कि विधानसभाओं को भारत सरकार या किसी भी राज्य की सरकार द्वारा आयोजित लॉटरी पर कर लगाने की कोई शक्ति नहीं है और केवल संसद ही ऐसा कर लगा सकती है। कर्नाटक और केरल सरकार दोनों ने कर लगाने के लिए कर्नाटक टैक्स ऑन लॉटरीज एक्ट, 2004 और केरल टैक्स ऑन पेपर लॉटरीज, एक्ट, 2005 पर भरोसा किया। कर्नाटक सरकार के वकील ने तर्क दिया कि विचाराधीन कर जुआ पर लगने वाला कर है जो संविधान की सूची 2 की प्रविष्टि 62 में पाया जा सकता है। केरल ने भी यही सबमिशन अपनाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य विधानसभाओं के पास सूची 2 की प्रविष्टि 62 के तहत लॉटरी पर कर लगाने का अधिकार है, क्योंकि उस प्रविष्टि के तहत कराधान सट्टेबाजी और जुए गतिविधियों पर है, जिसमें लॉटरी भी शामिल है, भले ही संस्था इसका संचालन करती हो। कर्नाटक और केरल राज्यों की विधायिका भारत सरकार द्वारा संचालित लॉटरी सहित संबंधित राज्यों में आयोजित और संचालित सट्टेबाजी और जुआ की गतिविधि पर लगाए गए अधिनियमों को लागू करने और कर लगाने के लिए पूरी तरह से सक्षम थी। पीठ ने कहा कि कर्नाटक और केरल के अधिनियमों के तहत संबंधित राज्यों की सरकारों के एजेंटों या प्रमोटरों के पंजीकरण के लिए वहां लॉटरी योजनाओं के संचालन के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। इसमें कहा गया है, यह अपने आप में जवाबदेह राज्यों, जो लॉटरी का आयोजन कर रहे हैं और कर्नाटक व केरल राज्यों के बीच पर्याप्त क्षेत्रीय सांठगांठ की ओर इशारा करता है। –आईएएनएस एसजीके

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