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Monday, March 2, 2026
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अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर स्पीकर ओम बिरला सख्त, सचिवालय को दिए जांच के आदेश; राहुल गांधी ने नहीं किए साइन

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है। पार्टी ने लोकसभा महासचिव को यह नोटिस नियम 94C के तहत दिया है, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया है। पार्टी ने लोकसभा महासचिव को यह नोटिस नियम 94C के तहत दिया है, जिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव पर साइन नहीं किया। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, संसदीय परंपरा के चलते LoP का स्पीकर को हटाने वाली पिटीशन पर साइन करना सही नहीं माना गया।

अपने खिलाफ प्रस्ताव पर स्पीकर का बड़ा कदम

अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस मिलने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा सचिवालय को तुरंत जांच करने का आदेश दिया है। नियमों के अनुसार अब नोटिस का आकलन किया जाएगा और आगे की प्रक्रिया तय होगी।

विपक्ष ने क्यों उठाया यह कदम?

विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई और कुछ महिला सांसदों के साथ सदन में अनुचित स्थिति बनी। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकसभा में विपक्ष को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्तापक्ष को खुली छूट है।

विपक्षी दलों की बैठक में बनी रणनीति

आज सुबह संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में विपक्षी नेताओं की बैठक हुई। इसमें टीएमसी, वाम दल, डीएमके, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) सहित कई दलों ने हिस्सा लिया और अविश्वास प्रस्ताव लाने पर सहमति बनी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के कदम को बेअसर बताते हुए कहा कि प्रस्ताव लाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि विपक्ष के पास जरूरी संख्या नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने स्पीकर के पद की गरिमा का अपमान किया है।

पहले भी आ चुके हैं ऐसे प्रस्ताव

भारतीय संसदीय इतिहास में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव बहुत कम बार लाए गए हैं। 1954 में जी.वी. मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव आया था, जो खारिज हो गया। 1966 में हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव पर्याप्त समर्थन न मिलने से गिर गया। 1987 में बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव भी सदन ने खारिज कर दिया था। संविधान के आर्टिकल 94 के मुताबिक, स्पीकर को हटाने के लिए 14 दिन का नोटिस और सदन में बहुमत का समर्थन जरूरी होता है। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद संसद में सियासी माहौल गरमा गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

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