नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को घोषणा की कि 1 अप्रैल से प्याज के निर्यात पर 20 प्रतिशत सीमा शुल्क हटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होगी और उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा।
किसानों को मिलेगा लाभ, वैश्विक बाजार तक पहुंचेगा प्याज
कृषि मंत्री ने एक वीडियो संदेश में कहा, “अब प्याज के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जिससे हमारे किसानों का प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेगा और उन्हें उचित मूल्य मिलेगा।” इससे पहले सरकार ने निर्यात शुल्क को 40 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत किया था, लेकिन अब इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
प्याज की कीमतों में गिरावट से किसानों को नुकसान
रबी सीजन में प्याज की अच्छी पैदावार हुई है, जिससे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कीमतों में गिरावट देखी गई। महाराष्ट्र के लासलगांव और पिंपलगांव में 21 मार्च को प्याज की कीमतें क्रमशः 1,330 रुपये और 1,325 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गईं। सरकार ने बताया कि फरवरी से अब तक प्याज की औसत कीमतों में 39 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, इस साल रबी प्याज का उत्पादन 227 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले साल के 192 लाख टन की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। अधिक उत्पादन के चलते आने वाले महीनों में कीमतों में और कमी आ सकती है। सरकार का कहना है कि निर्यात शुल्क हटाने का फैसला किसानों को सही मूल्य दिलाने और बाजार को संतुलित बनाए रखने के लिए लिया गया है।
घरेलू आपूर्ति बनी रहेगी, आम जनता पर कोई असर नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले का आम उपभोक्ताओं पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि बाजार में प्याज की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में बनी हुई है। इससे कीमतों में किसी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। सितंबर 2024 में निर्यात शुल्क लगाए जाने के बावजूद, चालू वित्त वर्ष में 18 मार्च तक प्याज का कुल निर्यात 11.65 लाख टन पहुंच गया है। सितंबर में 0.72 लाख टन प्याज निर्यात किया गया था, जो जनवरी 2025 में बढ़कर 1.85 लाख टन हो गया। सरकार का कहना है कि वह किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने और उपभोक्ताओं के लिए उचित कीमत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार हमेशा किसान हितैषी रही है और यह फैसला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्याज पर निर्यात शुल्क हटाने का यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है। इससे उन्हें अपनी फसल के लिए बेहतर मूल्य मिल सकेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की प्याज आपूर्ति भी बढ़ेगी।





