नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले और Operation Sindoor पर अहम बहस होनी थी, लेकिन उससे पहले ही एक अलग चर्चा शुरू हो गई, कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ‘मौन व्रत’ वाले बयान को लेकर। दरअसल, जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने सरकार को घेरे में लेने की कोशिश की, नारेबाज़ी हुई और सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसी बीच जब मीडिया ने शशि थरूर से सवाल किया कि वह चर्चा में क्यों नहीं बोल रहे, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए सिर्फ इतना कहा, “मौन व्रत… मौन व्रत”, और अंदर चले गए। उनका यह संक्षिप्त जवाब अब बड़े राजनीतिक संदेश की तरह देखा जा रहा है।
कांग्रेस की लिस्ट में नहीं थरूर का नाम
इस बार कांग्रेस ने संसद में बोलने के लिए जिन छह नेताओं का चयन किया है, उनमें शशि थरूर शामिल नहीं हैं। ये 6 नेता हैं- गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाड्रा, दीपेंद्र हुड्डा, प्रणीति एस. शिंदे, सप्तगिरि उलाका, बिजेंद्र एस. ओला, कई लोग मान रहे थे कि थरूर को पार्टी की तरफ से बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, क्योंकि उन्होंने हाल ही में सरकार के विशेष प्रतिनिधिमंडल की अगुआई की थी और विदेशों में भारत का पक्ष मजबूती से रखा था।
क्या पार्टी से दूरी बढ़ रही है?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच विचारों का मतभेद बढ़ रहा है। थरूर कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलेआम तारीफ कर चुके हैं, जिससे पार्टी के कुछ नेताओं को असहजता हुई है। हालांकि थरूर हमेशा यह कहते रहे हैं कि उनके निजी विचार पार्टी लाइन से थोड़े अलग हो सकते हैं।
कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप
कांग्रेस ने अपने सांसदों को इस महत्वपूर्ण बहस में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया है। अगले तीन दिनों तक पार्टी के सांसदों को सदन में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए कहा गया है। शशि थरूर का ‘मौन व्रत’ बयान भले ही दो शब्दों का हो, लेकिन उसके पीछे एक बड़ी कहानी छिपी है, क्या यह सिर्फ मजाक था या पार्टी से मिल रही अनदेखी पर तंज? आने वाले दिनों में इसका असर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर जरूर देखने को मिलेगा।




