नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । भारतीय सेना के द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गए ऑपरेशन सिंदूर की उपलब्धियां और आतंकवाद का समर्थक पाकिस्तान को बेनकाम करने केंद्र सरकार 32 देशों में अलग-अलग ऑल पार्टी डेलिगेशन भेज रही है। इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद, पूर्व मंत्री और राजदूत, सीनियर आधिकरी को शामिल किया गया है। यह डेलिगेशन कई देशों का दौरा करेगा। वहां की सरकार, राजनीतिक दल और आम जनता को ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की साजिश को बेनकाम करेगे।
सरकार के इस फैसले को सभी राजनीतिक दलों ने सहीं बताया। NCP प्रमुख शरद पवार ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, तो वहीं, दूसरी और शिवसेना यूबीटी गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए केंद्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए बीते दिन डेलिगेशन की तुलना ‘बारात’ से की थी। इस मामले में शरद पवार ने संजय राउत को नसीहत दी है।
‘पार्टी से ऊपर उठकर लें फैसले’
NCP मुखिया शरद पवार ने संजय राउत पर तंज कसते हुए कहा कि लोकल पॉलिटिक्स को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से नहीं जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पार्टी के मंशा के अनुरुप फैसले नहीं लिए जाते। जब पीवी नरसिम्हा राव पीएम थे, तब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एक डेलिगेशन संयुक्त राष्ट्र गया था और तब मैं भी उस डेलिगेशन का मेंबर था।
‘स्थानीय राजनीति से ऊपर उठकर…’
उन्होंने आगे कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय मुद्दे सबसे आगे हों, तो किसी को पार्टी लाइन पर स्टैंड नहीं लेना चाहिए। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत का रुख क्या है, यह बताने के लिए डेलिगेशन को विदेश दौरे पर भेजा जा रहा है। एनसीपी अध्यक्ष ने कहा कि संजय राउत जो भी कहें, उन्हें कहने का हक है। लेकिन शायद उनकी पार्टी की एक सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी भी इस डेलिगेशन में शामिल हैं। शरद पवार ने कहा कि लोकल पॉलिटिक्स को इंटरनेशनल इश्यू से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
श्रीकांत शिंदे को भेजने पर सवाल
रविवार को शिवसेना सांसद और नेता संजय राउत ने डेलिगेशन को विदेश भेजने के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इस ‘बारात’ को भेजने की क्या जरूरत थी। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे का बेटा विदेश में भारत का क्या प्रतिनिधित्व करेगा। संजय राउत ने केंद्र सरकार पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए INDIA ब्लॉक के नेताओं से इस डेलिगेशन का बहिष्कार करने की अपील की है। हालांकि, शिवसेना (UBT), कांग्रेस, एनसीपी (SP) और टीएमसी जैसे तमाम विपक्षी दलों के सांसद इस डेलिगेशन में शामिल हैं।





