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Tuesday, March 3, 2026
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रतन टाटा के निधन पर कुछ इस तरह टूट गए शांतनु नायडू, कहा- “दोस्ती के खालीपन को भरने में पूरी जिंदगी लग जाएगी”

रतन टाटा के निधन पर उनके सबसे छोटे दोस्त शांतनु नायडू पूरी तरह से टूट गए है। शांतनु ने एक भावुक पोस्ट में रतन टाटा को गुडबॉय कहा। जानें कौन है शांतनु और कैसे बने रतन टाटा के करीबी दोस्त।

नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। “इस दोस्ती ने मुझमे जो खालीपन छोड़ा है, उसे भरने में अपनी बाकी की पूरी जिंदगी बिता दूंगा। दुख, प्यार के लिए चुकाई जाने वाली कीमत है। गुडबॉय मेरे लाइटहाउस” यह भावुक शब्द रतन टाटा के सबसे छोटे दोस्त शांतनु नायडू के हैं। रतन टाटा के निधन के बाद पूरा देश शोक मना रहा है। रतन टाटा और शांतनु की दोस्ती को तो हम सभी जानते हैं। दोनो एक दूसरे के करीब थे और दोनो की दोस्ती किसी खून के रिश्ते से कम नहीं थी। 

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शांतनु का भावुक पोस्ट 

शांतनु ने गुरुवार सुबह 10 अक्टूबर को टूटे मन से एक भावुक पोस्ट में रतन टाटा को श्रद्धांजलि दी। भले ही दोनों की उम्र में काफी फांसला है मगर उनके किस्से आए दिन वायरल होते रहते थे। शांतनु ने पोस्ट लिंक्डइन पर किया है। 

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जब शांतनु और रतन टाटा की फोटो वायरल होने लगी 

शांतनु और रतन टाटा की तस्वीरें जब सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी तब लोगो के मन में सवाल आने लगा कि कौन है शांतनु जिनसे रतन टाटा का खास लगाव है। आपको बता दें कि शांतनु नायडू रतन टाटा के अच्छे दोस्त और भरोसेमंद असिस्टेंट है। साथ ही रतन टाटा को सलाह देते रहे हैं। बता दें कि शांतनु का रतन टाटा से कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं है। शांतनु मुबंई का रहने वाला लड़का है। आपको शायद ही पता होगा कि रतन टाटा ने शांतनु को खुद फोन कर साथ में काम करने के लिए अपरोच किया था। साथ ही कहा था कि आप जो काम करते हैं मैं उससे प्रभावित हूं। रतन टाटा ने शांतनु से यह भी पूछा था कि क्या आप मेरे असिस्टेंट बनेंगे? 

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कैसे बनें गहरे दोस्त? 

एक बार शांतनु की फेसबुक पोस्ट पढ़ने के बाद रतन टाटा ने सीधा उन्हें मीटिंग के लिए बुला लिया। शांतनु ने अपने पोस्ट में आवारा कुत्तों के लिए रिफ्लेक्टर के साथ बनाए गए डॉग कॉलर के बारे में लिखा था ताकि ड्राइवर मुबंई की सड़को पर डॉगी को देख सकें ताकि कुत्तों को नुकसान न पहुंचाया जा सके। 

उस समय शांतनु एक छात्र थे और उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे इसलिए वो डेनिम पैंट का इस्तेमाल करके रिफ्लेक्टिव कडलर बनवाकर 500 अवारा कुत्तों को पहनाया था। इन रिफ्लेक्टर की वजह से ड्राइवर कुत्तों को देख लेते थे और जिनसे कुत्तों की जान बच सकती थी। शांतनु के अच्छे काम की चर्चा होने लगी थी। 

रतन टाटा ने एक एनिमल एक्टिविस्ट के नाते शांतनु के साथ मीटिंग के लिए निमंत्रण भेजा। शांतनु के बारे में टाटा कंपनी के समाचार पत्र में बताया गया था। शांतनु ने अमेरिका से कॉर्नेल विश्वविद्यालय से MBA करने के बाद टाटा में डिप्टी जनरल मैनेजर के रूप में टाटा में शामिल हो गए। इसके बाद रतन टाटा और शांतनु की दोस्ती बढ़ने लगी। पिछले 10 सालों से वे रतन टाटा के करीबी रहे। दोनों की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी थी। 

सार्वजनिक जगहों पर रतन टाट शांतनु के साथ नजर आते रहे हैं। रतन टाटा के निधन के बाद शांतनु के जीवन में खालीपन आ गया है जिसका ज्रिक उन्होंने अपनी पोस्ट में भी किया है।  

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