नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । शंकराचार्य विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत और संत समाज में बयानबाजी तेज हो गई है। जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह के बाद अब तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में सामने आए हैं। परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर मुख्यमंत्री के खिलाफ लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने ऐलान किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रामनगरी अयोध्या में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस बयान के बाद शंकराचार्य विवाद ने और तूल पकड़ लिया है।
“जब तक माफी नहीं, अयोध्या में नहीं देंगे प्रवेश”
परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औरंगजेब और हुमायूं का बेटा बताना बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। परमहंस आचार्य का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश में शासन व्यवस्था को मजबूत किया है और लगातार सनातन धर्म के हित में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयान वापस नहीं लेते, तब तक उन्हें अयोध्या में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
परमहंस आचार्य माफी की मांग पर अड़े
परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाय से जुड़े मुद्दे पर चलाया जा रहा आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और इसका उद्देश्य विपक्ष को लाभ पहुंचाना है। उनका कहना है कि केवल गाय को राष्ट्र माता घोषित कर देने से बछड़ों और बैलों के वध की समस्या अपने आप खत्म नहीं होगी। परमहंस आचार्य ने यह भी कहा कि भगवा धारण कर किसी संत द्वारा इस तरह की टिप्पणी करना अनुचित है। उन्होंने सभी सनातनियों से अपील की कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बयान वापस नहीं लेते, तब तक उनका बहिष्कार किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए और देशभर में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव स्तर पर ही गौ रक्षा की प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। गौरतलब है कि इससे पहले अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर पंकज सिंह भी मुख्यमंत्री योगी के समर्थन में इस्तीफा दे चुके थे, हालांकि चार दिन बाद उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया था।





