नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । मंदिर-मस्जिद विवाद पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर राजनीति जारी है। इस बीच भागवत के बयान पर एक आध्यात्मिक गुरु ने प्रतिक्रिया दी है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि मोहन भागवत हिंदुओं की दुर्दशा नहीं समझते हैं । शंकराचार्य ने कहा कि यह सच है कि कई हिंदू मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत के बयान से साफ है कि उन्हें हिंदुओं का दर्द महसूस नहीं हो रहा है। वे वास्तव में हिंदुओं की दुर्दशा नहीं समझते।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों RSS प्रमुख ने मंदिर-मस्जिद विवाद फिर से शुरू होने पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद कुछ लोगों को गलतफहमी है कि वह ऐसे मुद्दे उठाकर ‘हिंदुओं के नेता’ बन सकते हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि “मोहन भागवत ने दावा किया है कि कुछ लोग नेता बनने के लिए ये मुद्दे उठाते हैं, लेकिन मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैं हिंदू नेता बनने की इच्छा नहीं रखता।” इस संबंध में मीडिया में आई तमाम रिपोर्ट के मुताबिक, शंकराचार्य ने कहा कि “वह सिर्फ हिंदुओं के साथ हो रहे अन्याय को उठा रहे थे।” पुणे में सहजीवन व्याख्यान श्रृंखला में ‘भारत-विश्वगुरु’ विषय पर बोलते हुए भागवत ने ‘समावेशी समाज’ की वकालत की। उन्होंने कहा कि अब हर दिन नए मंदिर-मस्जिद विवाद खड़े हो रहे हैं। इसे हल करने की जरूरत है, हमें दुनिया को दिखाना चाहिए कि हम मिलजुल कर रह सकते हैं, इसलिए हमें अपने देश में कुछ प्रयोग करने चाहिए।
भागवत की टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख को बीजेपी से ‘सद्भावना’ की अपील करनी चाहिए। अखिलेश ने कहा कि अगर वह योगी आदित्यनाथ को बुलाएंगे तो भी कोई सर्वे नहीं होगा और न ही ऐसा कोई विवाद होगा। उधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भागवत के बयान की आलोचना की और इसे दोहरा मापदंड बताया। उत्तर प्रदेश की विभिन्न अदालतों में मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े कई मामले दायर किए गए हैं, जिनमें संभल का मामला सबसे ज्यादा चर्चित है।




