नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पटियाला की नाभा जेल में 224 दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को जमानत मिल गई। 25 जून 2025 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद मंगलवार को मजीठिया जेल से बाहर आए और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया।
मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत
सोमवार (2 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति मामले में जमानत दे दी। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मजीठिया ने इसमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें पहले जमानत नहीं दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मजीठिया पिछले सात महीने से जेल में हैं।
पिछले साल 4 दिसंबर को हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि मजीठिया जांच को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अब जमानत दे दी, जिससे मजीठिया आज़ाद हो गए।
540 करोड़ रुपये की संपत्ति का आरोप और जांच का आदेश
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के मामले में 25 जून 2025 को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि मजीठिया ने क़रीब 540 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की। हाईकोर्ट ने विजिलेंस ब्यूरो को तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया और कहा कि उसके बाद मजीठिया जमानत पर रिहाई की मांग कर सकते हैं।
मजीठिया और ड्रग्स मामले में जमानत की बात
मजीठिया के खिलाफ FIR पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम ने 2021 के ड्रग्स मामले में दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया की ओर से वरिष्ठ वकील एस. मुरलीधर ने कहा कि पहले भी मजीठिया को NDPS एक्ट, 1985 के तहत दर्ज एक मामले में जमानत दी गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की चुनौती को खारिज कर दिया था, जो मजीठिया को दी गई जमानत को रद्द करना चाहती थी।




