नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक कथावाचक की जाति पूछने के बाद की गई पिटाई, बाल काटने और महिला से ज़बरदस्ती पैर छुआने की घटना का वीडियो वायरल होते ही मामला गरमा गया है। इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना की कड़ी निंदा की है।
घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए संत सिंह यादव ने कहा कि यह मामला दानरपुर गांव का है, जहां वे कथा करने के लिए पहुंचे थे। उन्होंने बताया, “हम गांव में भागवत कथा करने आए थे। मंदिर के एक पाठक बाबा और पप्पू महाराज हमारे पास आए थे और कथा के लिए आमंत्रित किया था। उनके आग्रह पर हम गांव पहुंचे।” संत सिंह ने आगे बताया, “कथा का मुख्य वाचन हमारे साथ मौजूद मुकुटमणि शास्त्री करते हैं और मैं उनकी सहायता करता हूं।”
‘पहले स्कूल चलाते थे’
संत सिंह यादव ने बताया कि उन्होंने भागवत कथा का पहला श्लोक पढ़ लिया था और कथा भी शुरू हो चुकी थी। शाम को गांव के कुछ लोगों ने उनकी जानकारी लेने की कोशिश की। जब उन्होंने पूछा कि आप कहां के रहने वाले हैं, तो संत यादव ने बताया कि वे कानपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने आगे कहा, “पहले मैं एक स्कूल चलाता था और शिक्षक था, लेकिन जब स्कूल बंद हो गया, तो मैंने कथा वाचन शुरू कर दिया।” इसके बाद लोगों ने उनसे उनकी जाति पूछी। उन्होंने बताया, “जब मैंने कहा कि मैं यादव हूं, तो उन्होंने कहा कि तुम्हारी जाति तो बहुत नीची है। फिर उन्होंने मुझसे पहचान पत्र मांगा। मेरे पास उस समय आधार कार्ड नहीं था, तो मैंने कहा कि मेरा मोबाइल नंबर ले लो, घर से पूछ सकते हो।”
‘यादव’ सुनते ही हमला कर दिया
उन लोगों ने मेरा नंबर लेकर मेरे बेटे से बात की। बेटे के नाम में ‘यादव’ सुनते ही उन्होंने कहना शुरू कर दिया कि यह गांव तीन सौ देवी-देवताओं का ब्राह्मणों वाला गांव है, और तुम यादव होकर यहां कथा कहने चले आए हो। फिर उन्होंने मुझ पर हमला कर दिया। उन्होंने मेरे बाल काट दिए और मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया। संत सिंह यादव का आरोप है कि आरोपियों ने एक महिला से मूत्र उन पर फिंकवाया और कहा, “अब ब्राह्मण का मूत्र तुम पर गिर गया है, अब तुम शुद्ध हो गए हो।” संत ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही सब कुछ साफ बता दिया था, लेकिन फिर भी गांव में उन्हें ताने दिए गए कि “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ब्राह्मणों के गांव में आने की और गद्दी पर बैठने की।”
‘हमें ब्राह्मण कथावाचक चाहिए था’
मुख्य वक्ता मुकुट मणि ने बताया, “मैं कथा वाचक हूं। गांव वालों ने मुझे बंदी बना लिया, मेरा मोबाइल छीन लिया और 25 हज़ार रुपये, एक सोने की चेन और चार अंगूठियां ले लीं। बाद में तीन अंगूठियां लौटा दी गईं। उन्होंने लात-घूंसे मारे और जबरन पैर भी छुवाए। पहले मेरे सहायक आचार्य के बाल काटे, फिर मेरे भी। इसके बाद जय बजरंगबली के नारे लगाए और फिर हमें वहां से भगा दिया।” उन्होंने आगे बताया, “असल वजह यह थी कि हम यादव हैं और वे लोग कहने लगे कि उन्हें तो ब्राह्मण वक्ता चाहिए। मैंने कहा कि ये बात तो आप पहले पूछ लेते। शुरुआत में किसी ने जाति नहीं पूछी, लेकिन जब उन्होंने ‘यादव’ सुना, तो साफ कहा गया कि यह ब्राह्मणों का गांव है और यहां तुम कथा नहीं कर सकते।”
चार आरोपी गिरफ्तार
इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि थाना बकेवर की पुलिस को पीड़ित की तहरीर मिल चुकी है। मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है। पुलिस ने अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।





