नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने ड्रीम प्रोजेक्ट सामूहिक विवाह योजन में बड़ा बदलाव किया है। जिसमें सामूहिक विवाह योजना को और पारदर्शी बनाने के लिए विवाहों में दूल्हा और दुल्हन की बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। इतना ही नहीं विवाह कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी की उपस्थिति को भी अनिवार्य किया गया है, ताकि योजना में किसी भी तरह की धांधली न हो सके। इन सख्त नियमों का मकसद योजना में किसी भी तरह की अनियमितता को रोकना और लाभार्थियों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना है।
आधार कार्ड आधारित सत्यापन प्रक्रिया लागू
बता दें, योगी सरकार ने सामूहिक विवाह योजना के तहत होने वाले विवाहों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए वर और वधू की बायोमेट्रिक को अनिवार्य कर दिया है। अब विवाह स्थल पर दोनों पक्षों को अपनी उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए दर्ज करानी होगी। इसके लिए आधार कार्ड आधरित सत्यापन प्रक्रिया को लागू कर दिया गया है। इस कदम से अब केवल पात्र लाभार्थी ही इस योजना का लाभ उठा सकेगें।
सत्यापन में लापरवाही पर होगी कार्रवाई
नए नियमों के अनुसार, दुल्हन के आधार सत्यापन में किसी भी तरह की लापरवाही को अब गंभीरता से लिया जाएगा। यदि सत्यापन प्रक्रिया में कोई गलती या अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सरकार ने साफ कड़े शब्दों में आधार सत्यापन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिविहीन रखने निर्देश दिया है।
डीएम की मौजूदगी जरूरी
अब इस योजना में सामूहिक विवाह समारोह की निगरानी को और मजबूत करने के लिए प्रत्येक आयोजन में जिलाधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी। डीएम को यह सुनिश्चित करना होगा कि, विवाह प्रक्रिया नियमों के अनुसार हो रही है या नही। सभी लाभार्थी पात्रता मानदंडों पूरा करते हैं या नहीं। यह कदम योजना के दुरुपयोग को रोकने और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
CM का ड्रीम प्रोजेक्ट है
सीएम सामूहिक विवाह योजना उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वर-वधू के विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तहत सरकार दंपतियों को आर्थिक सहायता, उपहार और अन्य सुविधाएं प्रदान करती है। नए नियमों से न केवल योजना की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि, इसका लाभ केवल पात्र दंपतियों को ही मिले।




