नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश की सियासत में बुधवार का दिन बेहद अहम रहा। तीन साल बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और रामपुर के दिग्गज नेता आजम खान आमने-सामने आए। दोनों नेताओं की यह मुलाकात काफी भावनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रामपुर के जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में अखिलेश यादव का हेलीकॉप्टर उतरा, जहां खुद आजम खान ने पहुंचकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया और फिर हाथ पकड़कर साथ चलते हुए नज़र आए। यह तस्वीर अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।
तीन साल बाद मिले अखिलेश और आजम
2022 में जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद आजम खान और अखिलेश यादव की यह पहली मुलाकात है। दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ समय से दूरी और नाराजगी की खबरें चल रही थीं। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के ज़रिए अखिलेश यादव ने आजम खान को मनाने और संबंध मजबूत करने की कोशिश की है। मुलाकात से पहले ही आजम खान ने साफ कहा था कि वे अखिलेश यादव से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे, परिवार का कोई सदस्य शामिल नहीं होगा। इस बात से साफ था कि वे इस मुलाकात को सिर्फ राजनीतिक नहीं, व्यक्तिगत स्तर पर भी अहम मान रहे हैं।
बंद कमरे में हुई लंबी बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव और आजम खान के बीच यह बातचीत काफी देर तक बंद कमरे में चली। इस दौरान दोनों नेताओं के अलावा कोई और मौजूद नहीं था। बाद में वे हॉल में आए और आजम खान के परिवार के सदस्यों से भी मुलाकात की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों नेताओं के बीच भविष्य की राजनीतिक रणनीति रामपुर की स्थिति और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हुई। अखिलेश यादव की यात्रा को लेकर प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए थे। जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खान के घर के आसपास कई थानों की पुलिस तैनात की गई थी। जिले के सपा जिलाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता पहले से ही यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद थे। खुफिया विभाग ने भी इलाके में निगरानी बढ़ा दी थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। अखिलेश यादव और आजम खान की यह मुलाकात सपा के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच चली आ रही दूरी और मतभेद को यह मुलाकात कम कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा के अंदर एकता और मजबूती का संदेश देने की कोशिश है। रामपुर में हुई यह “दिल से दिल” मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि सपा की राजनीति में नई शुरुआत का संकेत हो सकती है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में अखिलेश यादव और आजम खान की यह नजदीकी उत्तर प्रदेश की सियासत में क्या नया मोड़ लाती है।




