नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच बुधवार को होने वाली मुलाकात से पहले राजनीति गर्मा गई है। जेल से रिहा होने के बाद पहली बार अखिलेश यादव आजम खान से रामपुर में मिलने जा रहे हैं, लेकिन इस मुलाकात से पहले आजम खान ने जो कहा, उससे सपा खेमे में हलचल मच गई है।
सिर्फ़ वो ही आएं कोई तीसरा नहीं
आजम खान ने अखिलेश यादव के साथ होने वाली मुलाकात को लेकर कहा,“वो आएंगे और मुझे सम्मान मिलेगा। ऐसा नहीं है कि वो पहली बार आ रहे हैं। मेरे तन-मन पर उनका हक़ है। वो आएंगे तो मुझे खुशी होगी, मेरा सम्मान बढ़ेगा। लेकिन मैं चाहता हूं कि सिर्फ़ वो ही आएं कोई तीसरा नहीं। उन्होंने साफ कहा कि मुलाकात में किसी तीसरे व्यक्ति की कोई जगह नहीं होगी। ये केवल दो लोगों की मुलाकात होगी. अखिलेश यादव और आजम खान की।
“मेरी बीवी ईद पर रो रही थी, कोई आया क्या?”
जब आजम खान से पूछा गया कि वे केवल अखिलेश यादव से ही क्यों मिलना चाहते हैं, तो उन्होंने भावुक लहजे में कहा,“दूसरे मुझसे क्यों मिलें? इतने दिनों से मेरे परिवार के बारे में किसने पूछा? मेरी बीवी ईद पर अकेली रो रही थी। कोई आया क्या? किसी का फोन आया क्या? तो अब क्यों आएं? उनकी यह बात उनके अकेलेपन और पार्टी से दूरी का संकेत देती है।
फोन पर बात भी नहीं हुई
आजम खान ने बताया कि जेल के दिनों में उनका फोन बंद था, इसलिए अखिलेश यादव से बात नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि अब ये सिर्फ़ दो लोगों की बातचीत होगी। तीसरे के लिए कोई जगह नहीं है, चाहे वो कोई भी हो। आजम खान के इस बयान से सपा की सियासत में हलचल मच गई है। अखिलेश यादव बुधवार को रामपुर पहुंचेंगे, लेकिन अब यह मुलाकात कितनी भावनात्मक और कितनी राजनीतिक होगी, यह देखना दिलचस्प रहेगा। सपा सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश करीब एक घंटे के लिए रामपुर में रहेंगे और सिर्फ आजम खान से ही मुलाकात करेंगे।
मोहिबुल्लाह नदवी पर भी नाराज
बताया जा रहा है कि आजम खान रामपुर के सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि वे अपने क्षेत्र में अपनी पसंद का टिकट तक नहीं दिला पाए। अगर अखिलेश यादव और आजम खान के बीच गिले-शिकवे दूर नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में सपा के अंदर नई खींचतान शुरू हो सकती है।
जेल के दिनों को याद कर बोले आजम खान
जेल के अनुभव पर आजम खान ने कहा कि वहां का व्यवहार बहुत मानवीय और सहानुभूतिपूर्ण था। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य पर कभी सवाल उठाया, तो उन्होंने कहा,“बाहर से कई संदेश आए, लेकिन मुझसे बात करने की हिम्मत कौन करता? जो सुना, वही कह रहा हूं।
क्या इस मुलाकात से मिटेगी दूरियां?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात से सपा में पुराना रिश्ता फिर मजबूत हो सकता है, लेकिन आजम खान के बयान ने यह साफ कर दिया है कि दिलों की दूरी अभी बनी हुई है। अब सबकी नजर बुधवार को रामपुर पर टिकी है जहां दो बड़े नेताओं की यह ‘वन-टू-वन’ मुलाकात समाजवादी राजनीति की दिशा तय कर सकती है।




