नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर के बयान के बाद बवाल मचा हुआ है। जिसे लेकर बुधवार, 3 सितंबर को लखनऊ स्थित उनके सरकारी आवास के बाहर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। ABVP ने राजभर के हालिया बयान को “असंवेदनशील और अभद्र” करार देते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस दौरान उनके आवास के बाहर पुतला दहन किया गया और जमकर नारेबाजी भी हुई।
दरअसल, मामला बाराबंकी के श्रीरामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर ओपी राजभर की टिप्पणी से जुड़ा है, जिसे ABVP ने आपत्तिजनक बताया है। संगठन के सदस्यों का कहना है कि ओपी राजभर ने छात्रों के हितों की अनदेखी करते हुए गैरजिम्मेदाराना बयान दिया। ओपी राजभर के बेटे अरुण राजभर ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवियों ने उनके आवास पर पत्थरबाजी भी की।
अरुण राजभर का आरोप, पिता को दी गई गालियां, आवास पर फेंके गए पत्थर
सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर ने लखनऊ स्थित आवास पर हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अराजक तत्वों ने उनके पिता ओम प्रकाश राजभर को गालियां दीं और उनके आवास पर पत्थर फेंके। अरुण राजभर ने इस घटना को “गुंडागर्दी” करार देते हुए कहा कि अति पिछड़े वर्ग के नेता के साथ इस तरह का व्यवहार निंदनीय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों का बर्ताव किसी छात्र संगठन से जुड़ा नहीं लगता।
अरुण राजभर ने यह भी कहा कि ओपी राजभर को गाली देना सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समाज को अपशब्द कहने जैसा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी को कोई शिकायत है, तो उसे लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या संबंधित अधिकारियों के पास जाना चाहिए। पूरे बयान के दौरान अरुण राजभर ने ABVP का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इस घटना को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास और पूर्व नियोजित साजिश बताया।
ओपी राजभर के बयान पर अरुण राजभर ने दी सफाई
अरुण राजभर ने बाराबंकी मामले को लेकर उठे विवाद में अपने पिता ओपी राजभर का बचाव किया है। उन्होंने लखनऊ स्थित आवास पर हुए हंगामे को “गुंडागर्दी” बताते हुए कहा कि कुछ लोग समाज में जानबूझकर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। बाराबंकी में विश्वविद्यालय में हुई पुलिस कार्रवाई पर ओपी राजभर की टिप्पणी को सही ठहराते हुए अरुण राजभर ने कहा कि “अगर कोई कानून अपने हाथ में लेता है तो पुलिस कार्रवाई करेगी, इसमें गलत क्या है? उन्होंने कुछ भी अनुचित नहीं कहा है।” अरुण राजभर ने प्रदर्शन को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि जो कुछ ओपी राजभर के आवास के बाहर किया गया, वह छात्रों का व्यवहार नहीं हो सकता। उन्होंने बिना ABVP का नाम लिए कहा कि यह पूरी तरह से अराजकता फैलाने की कोशिश है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
“कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं”
श्रीरामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय के बाहर एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। राजभर ने कहा कि “यह देश लोकतंत्र से चलता है। अगर किसी को कोई शिकायत थी, तो उन्हें शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल या प्रमुख सचिव से मिलना चाहिए था। अगर वहां भी बात न सुनी जाती, तब धरना देना एक विकल्प हो सकता था। लेकिन सीधे कानून अपने हाथ में लेना गलत है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई व्यक्ति या समूह कानून व्यवस्था को हाथ में लेगा, तो पुलिस कार्रवाई करना स्वाभाविक है।





